पटना/रांची : छठ महापर्व भारतीय संस्कृति का वह अद्भुत पर्व है जिसमें आस्था, अनुशासन और सात्विकता का संगम देखने को मिलता है। इस पर्व की विशेषता है कि छठव्रती न केवल सूर्य देव और छठी मइया की उपासना करते हैं, बल्कि पूरे व्रतकाल में अपने विचारों, खानपान और आचरण में सात्विकता को अपनाते हैं। यह सात्विकता ही छठ की आत्मा मानी जाती है।
बिहार से शुरू हुआ यह पर्व आज देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बसे भारतीयों के बीच श्रद्धा का प्रतीक बन गया है। छठ व्रती कठोर नियमों का पालन करते हुए चार दिनों तक उपवास रखते हैं। पूजा में उपयोग होने वाली हर वस्तु शुद्ध और सात्विक होती है—गंगाजल, फल, गुड़, चावल, और ठेकुआ जैसे पारंपरिक प्रसाद से पूजा संपन्न की जाती है। छठव्रती के साथ उनके घर-परिवार और सहयोग करने वाले भी सात्विक जीवन अपनाते हैं।

वे अपने घरों को स्वच्छ रखते हैं, मन को शांत और पवित्र रखते हुए भक्ति में लीन रहते हैं। यह पर्व केवल सूर्य की उपासना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, शुद्धता और सामाजिक एकता का संदेश देता है। छठ महापर्व की सात्विकता में निहित है प्रकृति, मानव और ईश्वर के बीच की गहरी कड़ी—जहां हर व्यक्ति सूर्य की आराधना कर यह संदेश देता है कि जीवन की उज्ज्वलता तभी संभव है जब मन, वचन और कर्म तीनों शुद्ध हों। यही सात्विकता छठ महापर्व को महान बनाती है।




