Saraikela (संजीव मेहता) : इंजीनियरिंग की दुनिया में क्रांति लाने वाली नई तकनीक ‘डिजिटल ट्विन’ को लेकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर में एक शानदार और जानकारी भरा सेमिनार आयोजित किया गया. इस सेमिनार का मकसद छात्रों को यह समझाना था कि आने वाले समय में बड़ी-बड़ी मशीनों और फैक्ट्रियों का कामकाज कैसे बदलने वाला है.
* क्या है यह ‘डिजिटल ट्विन’? डिजिटल ट्विन एक ऐसा कॉन्सेप्ट है, जिसमें किसी भी असली चीज़ की एक हूबहू वर्चुअल कॉपी (डिजिटल जुड़वां) कंप्यूटर में तैयार की जाती है. मान लीजिए, आपने एक बड़ी मशीन बनाई, तो कंप्यूटर में भी उसकी एक डिजिटल मशीन बन जाएगी. यह डिजिटल कॉपी असली मशीन से लगातार लाइव डेटा लेती रहती है.
* फायदा क्या है? इंजीनियर्स इस वर्चुअल मशीन पर कोई भी प्रयोग या बदलाव करके देख सकते हैं, जैसे कि यह असली में कैसे काम करेगी, बिना असली मशीन को नुकसान पहुंचाए. इससे बड़े फैसले लेना और मशीनों को और बेहतर बनाना बहुत आसान हो जाता है.
* पूर्व छात्रा ने दिए इंडस्ट्री के सबक- यह महत्वपूर्ण सेमिनार एनआईटी जमशेदपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग और उद्योग एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध प्रभाग (I&IR) ने मिलकर 16 अक्टूबर 2025 को आयोजित किया. इसकी मुख्य वक्ता थीं संस्थान की पूर्व छात्रा पूजा प्रियदर्शिनी, जो मैकेनिकल इंजीनियरिंग बैच (2011–2015) से हैं और वर्तमान में L&T टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनी में काम कर रही हैं. उन्होंने छात्रों को आसान भाषा में समझाया कि डिजिटल ट्विन कैसे फैक्ट्रियों के काम करने के तरीके को बदल रहा है.
* मशीन की भविष्यवाणी- पहले से पता चल जाता है कि मशीन कब खराब हो सकती है. प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस किसी भी उत्पाद या मशीन का डिज़ाइन बनाने से पहले ही कंप्यूटर में सबसे बेहतर तरीका खोजा जा सकता है.

* स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग- इससे प्रदूषण कम होता है और उत्पादन का तरीका और भी टिकाऊ (सस्टेनेबल) बनता है. सुश्री प्रियदर्शिनी ने छात्रों को मैकेनिकल इंजीनियरिंग के साथ-साथ डेटा एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई चीज़ों को भी सीखने के लिए प्रेरित किया. क्योंकि ये सब मिलकर ही उद्योग 4.0 (Industry 4.0) का भविष्य बनाएंगे.
* शिक्षकों और छात्रों की रही शानदार भागीदारी- इस कार्यक्रम के समन्वय में स्टूडेंट एलुमनाई सेक्रेटरी सुश्री ईशिका गुप्ता और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. डीन (I&IR) प्रो. के. बी. यादव, एसोसिएट डीन डॉ. राम कृष्ण, और प्रो. परमानंद व प्रो. संजय सहित अन्य फैकल्टी सदस्यों ने मार्गदर्शन दिया. सेमिनार में छात्रों, शिक्षकों और रिसर्च स्कॉलर्स ने बड़े उत्साह से हिस्सा लिया और डिजिटल टेक्नोलॉजी के भविष्य पर कई सोच-समझकर पूछे गए सवाल भी किए. यह आयोजन शिक्षा और इंडस्ट्री की प्रैक्टिकल दुनिया के बीच एक मजबूत पुल का काम कर गया, जिससे छात्रों को अपने एलुमनाई (पूर्व छात्रों) के अनुभव से सीखने का बेहतरीन मौका मिला. क्या आप जानना चाहेंगे कि ‘डिजिटल ट्विन’ टेक्नोलॉजी भारत के किन-किन बड़े उद्योगों में इस्तेमाल हो रही है?




