जमशेदपुर/रांची : नशे का काला कारोबार अब नए-नए रूप लेता जा रहा है। ताजा जानकारी और खुलासे में यह सामने आया है कि कबाड़ी की दुकानों और गोदामों को नशे की सप्लाई चेन के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कबाड़ खरीद-बिक्री का धंधा देखने में भले ही सामान्य लगता हो, लेकिन इसकी आड़ में ब्राउन शुगर, गांजा और अन्य मादक पदार्थों की खेप आसानी से सप्लाई की जा रही है।

सूत्रों से जानकारी के अनुसार, कबाड़ी के गोदामों में कबाड़ की बोरियों के बीच नशे का माल छिपाकर रखा जाता है। वहीं, कबाड़ ढोने वाले वाहनों से यह खेप एक इलाके से दूसरे इलाके तक बिना रोक-टोक पहुँचाई जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गली-मोहल्लों और सुनसान इलाकों में मौजूद कबाड़ी की दुकानों पर पुलिस का संदेह कम होता है। इसी कारण कुछ नशा मादक पदार्थ माफिया,इन्हें सुरक्षित अड्डे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों की मानें तो इस गोरखधंधे में गरीब और बेरोजगार युवाओं को शामिल किया जाता है।
उन्हें मामूली लालच देकर नशे की सप्लाई चेन का हिस्सा बना दिया जाता है। इसका सीधा असर समाज पर पड़ रहा है। जहां एक ओर युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है, वहीं नशे के कारण अपराध भी लगातार बढ़ रहे हैं। प्रशासन ने ऐसे कबाड़ियों पर कड़ी निगरानी रखने की बात तो, कहती है, पर दिखता नहीं है । वहीअधिकारियों का कहना है कि कबाड़ी की आड़ में फलता-फूलता नशे का यह कारोबार समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ा खतरा है। जिसे कबाड़ी की आड़ में फलता-फूलता यह नशे का काले कारोबार का गोरख धंधा पुलिस से के लिए एक गंभीर और बड़ी चुनौती है।



