जमशेदपुर : लोको रिक्रिएशन क्लब पहाड़ी पूजा कमेटी की ओर से 71वा सात दिवसीय मां पहाड़ी पूजा पंदीर राटा पूजन के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर लोको कॉलोनी स्थित पहाड़ी मंदिर प्रांगण में दक्षिण भारतीय महिलाएं इस पूजन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। 7 दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत दक्षिण भारतीय भाषा में पंदीर राटा जिसे सामान्य भाषा में मड़वा भी कहते हैं आयोजित की गई।

इस पर्व को लेकर कार्यकारिणी सचिव सतीश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि पंदीर राटा के साथ ही इस पर्व का आगाज हुआ है। 30 अप्रैल को पहाड़ी मां का आगमन होगा इसके लिए संध्या 6:00 बजे बड़ी संख्या में भक्तगण गाजे बाजे के साथ गोल पहाड़ी मंदिर पहुंचेंगे, जहां घंटों पूजन और मां का आशीर्वाद मिलने पर उन्हें लेकर पुनः मंदिर प्रांगण पहुंचेंगे। इसके बाद एक से पांच मई तक प्रत्येक दिन एक अलग रूप में श्रृंगार कर पूजन होगी और शाम 7:00 बजे नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे इस नगर भ्रमण का खासियत यह होती है कि इसमें सिर्फ महिला ही मौजूद रहती है। वही 6 अप्रैल को मां का विदाई समारोह होगा जिसमें शाम 7:00 बजे गाजे बाजे और आकर्षक आतिशबाजी के साथ विदाई जुलूस निकाली जाएगी जो गोल पहाड़ी मंदिर में जाकर समाप्त होगी। आतिशबाजी के लिए विशेष कर आंध्र प्रदेश और उड़ीसा से टीम मौजूद रहेंगी, वहीं झांकी के लिए भी आंध्र प्रदेश से ही मेकअप सदस्यों को बुलाया गया है, जबकि आकर्षक दक्षिण भारतीय वाद्य यंत्र खड़गपुर की होगी। इस पर्व की मान्यता है कि मां साक्षात पहाड़ पर प्रकट हुई थी ,कहा जाता है कि मां ग्वाला परिवार में जन्मी थी एक दिन पशुओं को चराने के लिए पहाड़ पर गई फिर वापस नहीं लौटी, दूसरे दिन ग्रामीणों ने मां को पत्थर के रूप में पाया तब से मां पहाड़ी के नाम से पूजी जाती है। इस प्रतिष्ठित पहाड़ी पूजा समारोह में जमशेदपुर के अलावा उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के सैकड़ो भक्त शामिल होंगे।




