सरायकेला / (संजीव मेहता) : शिव काली मंदिर परिसर में भागवत कथा प्रारंभ करते हुए मथुरा से पधारे स्वामी हिमांशु जी महाराज ने बताया कि भागवत कथा का महत्व अपरंपार है। इसके श्रवण एवं पठन से मनुष्य को आंतरिक शांति का अनुभूति होता है, तथा जीवन में सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होता है। हताशा तथा निराशा से बाहर निकलकर व्यक्ति भक्तिमार्ग पर चलता है और अत्यंत शांति का अनुभव करता है। भागवत कथा पहले केवल देवलोक में ही सुनाया जाता था, भगवान विष्णु माता पार्वती को तथा माता पार्वती भगवान विष्णु को भागवत महापुराण का कथा सुनाया करते थे जो महीना दो महीना का होता था। परंतु भगवान शुकदेव जी ने साधु संतो, ऋषि मुनियों के साथ-साथ विशेषकर राजा परीक्षित को सुनाया और उनका उद्धार किया।

कथावाचक ने बताया कि भागवत पुराण विधाता की कसौटी है और इसी कारण भी यह अतुलनीय है। इस पुराण में साधन ज्ञान, सिद्धज्ञान, साधन भक्ति, मर्यादा मार्ग, अनुग्रह मार्ग, द्वैत अद्वैत, समन्वय के साथ अत्यंत प्रेरणादाई उपरव्यानो का अद्भुत संग्रह है। यह हिंदुओं के 18 पुराणों में से एक है जो मुख्य रूप से भक्ति योग का शिक्षा देता है। इस पुराण में भगवान कृष्ण को सभी देवों के देव के रूप में चित्रित किया गया है। इस महापुराण में कुल 12 स्कंध है जिसमें प्रथम स्कंध में भगवान विष्णु के अवतारों का वर्णन है।





