Saraikela (संजीव मेहता) : आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के दिण्डली बस्ती में स्थित पौराणिक शिव मंदिर में 1818 ईस्वी से लगातार चड़क पूजा (Charak Puja) का आयोजन किया जा रहा है. अपनी 200 से अधिक वर्षों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए यह क्षेत्र में अत्यंत प्रसिद्ध शिव मंदिर है. दिण्डली चड़क पूजा की मुख्य बातें यह है कि इस ऐतिहासिक पूजा की शुरुआत वर्ष 1818 में हुई थी.
यह पूजा मुख्य रूप से हर वर्ष ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार और मंगलवार को गांव की सुरक्षा और समृद्धि के लिए आयोजित की जाती है. इस पूजा की परंपरा और मान्यता यह है कि इस मौके पर भक्त अपनी आस्था के तहत शरीर में लोहे की सुइयां और हुक चुभवाते हैं. स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान के बाद ही खेती और गृहस्थी के असली कार्यों की शुरुआत होती है. पूजा के दौरान दिण्डली बस्ती में एक भव्य मेले का भी आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु और स्थानीय लोग शामिल होते हैं.

आज मंगलवार को बस्ती के पुराने तालाब के पास 20 से अधिक भोक्ता ने रजनीफोडा कराया और जलभराई कर नाचते गाते मंदिर तक पहुंचे. जिसमें बस्तीवासियों का आस्था देखते ही बन रहा था. राजनीभोक्ता और श्रद्धालुओं के लिए बस्ती की पार्षद राजरानी महतो और उनके पति रिटेन महतो ने शीतल पेय एवं चना का वितरण किया. उधर मंदिर परिसर में भगवान शिव को बकरे की बलि दी गई. यह देश का पहला शिव मंदिर है जहां उन्हें बलि दी जाती है. आज तकरीबन 50 बकरे की बलि दी गई. बता दें कि आज से मंदिर प्रांगण में दो दिनों तक विभिन्न शैलियों के छऊ नृत्य का आयोजन होगा जिसे देखने दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.





