राँची : पतरातू सुपर थर्मल पावर प्लांट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, लेकिन नौ साल बीतने के बावजूद इससे बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो सका है। झारखंड सरकार और एनटीपीसी के बीच 2015 में 4000 मेगावाट क्षमता वाले पावर प्लांट के लिए करार हुआ था। इस प्रोजेक्ट के तहत दो चरणों में निर्माण होना था, जिसमें पहले चरण में 2400 मेगावाट और दूसरे चरण में 1600 मेगावाट का उत्पादन तय था। पहला चरण 2019 में शुरू होना था, लेकिन अब तक निर्माण अधूरा है।
बनहर्दी कोल ब्लॉक में समस्याएं
पावर प्लांट को ईंधन देने के लिए आवंटित बनहर्दी कोल ब्लॉक में ड्रिलिंग और वन भूमि डिनोटिफिकेशन में अड़चनें आ रही हैं। अब तक 18 वर्ग किलोमीटर में से केवल 10 वर्ग किलोमीटर में ड्रिलिंग हुई है, जहां 900 मिलियन टन कोयला पाया गया है। शेष क्षेत्र की ड्रिलिंग और 268 एकड़ वन भूमि को डिनोटिफाई करने का प्रस्ताव अभी तक पूर्ण समाधान की प्रतीक्षा में है।

प्रधानमंत्री की समीक्षा और प्रगति
प्रधानमंत्री ने 2022 में इस प्रोजेक्ट की समीक्षा की थी, जिसमें 2024 से बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया। हालांकि, इसमें देरी का प्रमुख कारण प्रशासनिक और तकनीकी बाधाएं हैं।
एनटीपीसी-जेबीवीयूएनएल साझेदारी
पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) एनटीपीसी और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड की संयुक्त कंपनी है। एनटीपीसी 74% हिस्सेदारी के साथ प्रमुख निवेशक है, जबकि झारखंड सरकार भूमि, पानी और कोयला प्रदान कर रही है। निर्माण कार्य में देरी से झारखंड सरकार को मिलने वाली 85% बिजली आपूर्ति भी अटकी हुई है, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतों पर असर पड़ रहा है।




