बिहार : बिहार में जहरीली शराब से लगभग51लोगों की मौत ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। शराबबंदी की नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह केवल कागजों पर लागू होती दिख रही है। हाल की घटनाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि अवैध शराब का कारोबार राज्य में तेजी से फल-फूल रहा है। सिवान और सारण में मौतों के बाद प्रशासन ने 260 स्थानों पर छापेमारी की और 8 नामजद आरोपियों सहित कई अज्ञात लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। इस घटना ने सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार की शराबबंदी नीति नाकाम साबित हुई है और इसके प्रभावी कार्यान्वयन में गंभीर खामियां हैं।सत्ताधारी दल ने आरोप लगाया है कि विपक्ष इस घटना को राजनीतिक फायदा उठाने के लिए उपयोग कर रहा है। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच का आदेश दिया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि क्या इससे स्थिति में सुधार होगा।

आम जनता में भी असंतोष फैल गया है, क्योंकि वे इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि बिहार में शराबबंदी की नीति केवल एक दिखावा बनकर रह गई है। अगर सरकार वाकई गंभीर है, तो उसे न केवल सख्त कदम उठाने की जरूरत है, बल्कि इसे समाज में जागरूकता फैलाने और अवैध शराब के कारोबार को समाप्त करने के लिए भी ठोस रणनीति विकसित करनी होगी। ऐसा न होने पर बिहार की राजनीति में यह मामला और भी गर्माता रहेगा। वही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा ,अब दोषियों को बक्सा नहीं जाएगाl




