Anand rao : जमशेदपुर : 400 करोड़ का आधुनिक अस्पताल बनाने की दावा करने वाली सरकार की व्यवस्था धीरे-धीरे पोल खोलने लगी है,बाहर से चकाचौंद और आधुनिक दिखने वाली एमजीएम अस्पताल वास्तव में अंदर से खोखला साबित हो रही है, भले ही आधुनिकता के मापदंड को अपनाया गया है लेकिन व्यवस्था व्यवस्थित तरीके से नहीं हो रही है. चाहे साफ सफाई हो, पानी की व्यवस्था हो या लिफ्ट या फिर सुरक्षा की व्यवस्था मापदंड पर खड़े नहीं उतर रही है. स्वच्छता और सफाई की बात करें तो ड्रेन निकासी की व्यवस्था पूरी तरह से फेल है जिससे डेंगू और मलेरिया जैसे बीमारी को दावत दे रहा है, ओपीडी पंजीकरण विभाग के समीप गंदे पानी से बज़बाजा रहा है, कारण यह है कि गंदे पानी की निकासी की सही व्यवस्था नहीं होने से ड्रेन से यह गंदा पानी ओवरफ्लो कर जमा होने लगी है. जिस ओर प्रबंधन का ध्यान नहीं है और यह महामारी का रूप ले रहा है जो अस्पताल में इलाजरत मरीजों के लिए खतरे की घंटी है. इसी तरह शौचालय की बात करें तो अस्पताल स्टाफ के लिए जो शौचालय बना है वह तो चकाचौंद है लेकिन सार्वजनिक शौचालय की स्थिति ही कुछ और है, यहां नल चोरी हो जाने से पानी बंद है जिससे शौचालय में गंदगी फैली हुई है जो बीमारी को दावत दे रहा है साथ ही मरीज और उसके परिजन को परेशानी भी उठानी पड़ती है.

इसी तरह अस्पताल में 15 से ज्यादा लिफ्ट है लेकिन वह दिखावे के लिए है अधिकतर लिफ्ट तीन तल्ले के बाद सीधे 7 तल्ले पर ही रुकती है बीच के तल्ले पर जाना हो तो गंभीर इलाजरत मरीज को पैदल ही ले जाने के लिए परिजन मजबूर हैं, इतना तक की लिफ्ट के ऑपरेटर की बहाली नहीं होने से परिजनों को ही ऑपरेट करना पड़ता है, जो जाने अनजाने लिफ्ट खराब होने के जिम्मेदार भी है. अब सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो भले ही अस्पताल में आने-जाने के लिए सुरक्षाकर्मी मौजूद जरूर है, लेकिन 200 की जगह 90 सुरक्षा कर्मी ही अस्पताल को संभाले हुए हैं ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में कहीं ना कहीं चूक हो ही जाती है यही कारण है कि पिछले 5 महीने में गंभीर बीमारी के इलाजरत मैरिज ऊंचे तल्ले से कूद कर अपनी जान दे दी, लेकिन प्रबंधन सुरक्षा के लेकर गंभीर नहीं है मानो ऐसा लगता है कि भविष्य में और भी घटना होने का इंतजार कर रही है. इसी तरह अस्पताल बने डेढ़ वर्ष होने को है लेकिन 400 करोड़ के अस्पताल में प्रवेश करने के लिए एप्रोच रोड नहीं बना, गड्डों से भरा उबर खाबर सड़क से ही मरीज जान जोखी में डालकर अस्पताल में इलाज कराने आते हैं ऐसे में 400 करोड़ के इस अस्पताल की जो व्यवस्था है इसे कहा जा सकता है कि स्वस्थ स्वास्थ्य की जिम्मेदार एमजीएम खुद ही बीमार है जो विभाग और सरकार पूर्ण व्यवस्था देने में असफल साबित हो रही है.




