सरायकेला : दुर्गा पूजा, मां दुर्गा की आराधना का प्रमुख पर्व है, जो देश के कोने-कोने में मनाया जाता हैl यह पर्व शक्ति, विजय और नवीनीकरण का प्रतीक है। जो एकता और भक्ति की भावना को बढ़ाते हैं। दुर्गा पूजा भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि के दौरान कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा विशेष महत्व रखती है। यह परंपरा मां दुर्गा की आराधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें श्रद्धालु नवरात्रि के नौ दिनों में कन्याओं को सम्मानित करते हैं। इसे “कन्या पूजन” कहा जाता है और यह मान्यता है कि कन्याएं देवी का प्रतीक मानी जाती हैं।

कन्याओं को भोजन कराने से न केवल उन्हें सम्मानित किया जाता है, बल्कि समाज में नारी शक्ति और उनके सम्मान का प्रतीक भी है। यह कार्य श्रद्धा और समर्पण के साथ किया जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही, इस परंपरा से परिवार में एकता और भक्ति की भावना भी बढ़ती है। इसी भक्ति भावना और श्रद्धा पूर्ण भावनाओं से झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले के गम्हरिया बलरामपुर निवासी एकता विकास मंच के केंद्रीय अध्यक्ष सह theराष्ट्रीय न्यूज़ के चीफ एडिटर ए के मिश्रा ने पूरे परिवार सहित 9 दिनों का मां का आराधना कर ,भक्ति भाव से कन्या पूजन कर पूरे परिवार के साथ आशीर्वाद लिया।
कन्याओं को पूजा के बाद भोजन कराना और उन्हें उपहार देना, देवी मां का आशीर्वाद प्राप्त करने का एक तरीका है। इस दौरान किया गया हर कार्य सच्चे मन से किया जाए, तो वह अनंत फल प्रदान करता है। इस प्रकार, नवरात्रि में कुंवारी कन्याओं को खिलाने का महत्व आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण है।




