रांची : दागियों के हौसले तोड़ने और कानून का भय मन में बैठाने के लिए धनबाद पुलिस ने गुरुवार को ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पुलिस लाइन में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों के चिन्हित दागी अपराधियों की परेड कराई गई। एक-एक दागी की हाजिरी लगी, पहचान का सत्यापन हुआ और पुलिस अधिकारियों ने आंखों में आंखें डालकर साफ शब्दों में चेतावनी दी—”यह सुधारने का अवसर है, अपराध नहीं छोड़ा तो अगली मुलाकात जेल में होगी।”
झारखंड में पहली बार किसी जिले में इस तरह दागी अपराधियों की सामूहिक परेड कर उन्हें अपराध छोड़ने का खुला संदेश दिया गया। पुलिस का मानना है कि केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा करना भी अपराध नियंत्रण की प्रभावी रणनीति है।
सुबह से ही जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से चिन्हित दागी अपराधियों को पुलिस लाइन बुलाया गया। यहां उनकी उपस्थिति दर्ज की गई, पहचान का सत्यापन हुआ और उनके वर्तमान रहन-सहन, व्यवसाय, आवागमन तथा गतिविधियों की बारीकी से समीक्षा की गई। जिन अपराधियों का गंभीर आपराधिक इतिहास रहा है, उन्हें विशेष निगरानी सूची में रखते हुए संबंधित थाना प्रभारियों को उनकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने का निर्देश दिया गया।

परेड के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि धनबाद में अपराधियों के लिए अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचेगा। रंगदारी, हत्या, लूट, मारपीट, अवैध वसूली, भूमि कब्जा, अवैध कारोबार, हथियारों का प्रदर्शन या किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि में शामिल होने वालों पर बिना किसी नरमी के कार्रवाई होगी। अपराधियों की हर गतिविधि पुलिस की निगरानी में है और कानून तोड़ने की कीमत अब पहले से कहीं अधिक भारी पड़ेगी। अधिकारियों ने दागियों को यह भी समझाया कि समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं तो यही सबसे उचित समय है। पुलिस सुधार का अवसर दे रही है, लेकिन चेतावनी के बाद भी यदि कोई अपराध की राह पर लौटा तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ लगातार निगरानी, सत्यापन और त्वरित गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।
धनबाद पुलिस के इस अभियान का उद्देश्य केवल हाजिरी लेना नहीं, बल्कि अपराधियों के मन में कानून का स्थायी भय पैदा करना, संभावित अपराधों पर पहले ही रोक लगाना और जिले में शांति व कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाना है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभियान आगे भी नियमित रूप से जारी रहेंगे, ताकि अपराध करने की सोच रखने वालों तक यह संदेश साफ पहुंचे कि अब कानून पहले चेतावनी देगा, लेकिन दूसरी बार सीधे कार्रवाई होगी।






