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जमशेदपुर : जब पलता शुभ कर्म धरा पर, दीपक सम मन जलता है । रश्मिरथी वल्लरियों से तब, ऊष्मा सतत निकलता है ।।
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शुभता का जब भाव सजग हो, राष्ट्र प्रेम आनंद बने।
जिस बालक में देश भक्ति हो, वही विवेकानंद बने।
समरसता का भाव जगत में, ऐसे ही तो पलता है।
रश्मिरथी वल्लरियों से तब, ऊष्मा सतत निकलता है ।।
धरा देश या पूर्ण विश्व की, देश हृदय में धाम किया ।
शून्य विषय पर दे अभिव्यक्ति ,सारे जग में नाम किया ।
अपनेपन का भाव लिए ही, प्रेमिल भाव सम्हलता है।
रश्मिरथी वल्लरियों से तब, ऊष्मा सतत निकलता है ।।
स्वार्थ भाव में कुटिल कसौटी, जनहित की जब राह नहीं ।
तमस घना हो दुख की छाया, और धर्म की चाह नहीं।
जीव जगत में सार सत्य से, सबका जीवन चलता है।
रश्मिरथी वल्लरियों से तब, ऊष्मा सतत निकलता है ।।
प्रतिभा प्रसाद ‘कुमकुम’
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