नई दिल्ली / प्रतीक सिंह : किसान संगठनों ने अपनी मांगों, खासतौर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर लंबे समय से चल रहे धरने के बाद दिल्ली कूच का ऐलान किया है। हरियाणा प्रशासन ने स्थिति को ध्यान में रखते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। किसानों को रोकने के लिए राज्य में अलर्ट जारी कर दिया गया है। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि दिल्ली में प्रदर्शन या धरना देने की अनुमति नहीं है। हरियाणा सरकार ने पंजाब से सटे जिलों में भारी सुरक्षा बल तैनात किए हैं। 15 कंपनियां अर्धसैनिक बलों की तैनात की गई हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों को वाटर कैनन, वज्र वाहन, आंसू गैस, ड्रोन और दंगा रोधी उपकरणों से लैस किया गया है। संभावित प्रदर्शन को रोकने के लिए लोहे और पत्थर के बैरिकेड्स, कंटीले तार और कीलें लगाई गई हैं। नाकेबंदी के तहत अम्बाला, सिरसा, जींद, कैथल और फतेहाबाद जिलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 144 लागू की गई है, जिससे सार्वजनिक जमावड़े पर रोक लगाई जा सके।

किसानों ने शुक्रवार दोपहर 1 बजे दिल्ली की ओर पहला जत्था रवाना करने की योजना बनाई है। इस जत्थे में 101 किसान शामिल होंगे, जिन्हें ‘मरजीवड़े’ नाम दिया गया है। यह जत्था गुरु तेग बहादुर सिंह के शहीदी दिवस पर दिल्ली कूच करेगा। किसान नेताओं ने घोषणा की है कि पहला जत्था निहत्था होगा और अगर उन्हें रोका गया तो यह उनकी नैतिक जीत मानी जाएगी। इसके बाद हर दिन एक नया जत्था दिल्ली के लिए रवाना होगा। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) ने साफ किया है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा। दूसरी ओर, हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सुमिता मिश्रा ने किसानों से कहा है कि समस्याओं का समाधान सड़क पर नहीं, बल्कि बातचीत से होगा। उन्होंने किसानों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के समक्ष अपनी बात रखने की सलाह दी। यह स्थिति पिछले किसान आंदोलन की याद दिलाती है, जब बड़ी संख्या में किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर लंबा आंदोलन किया था। हालांकि, इस बार भी किसान अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं, और सरकार का रुख कड़ा नजर आ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आने वाले दिनों में यह आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है।




