दिल्ली ( प्रतिक सिंह ) : दिल्ली में हुए धमाकों की पड़ताल में सामने आया कि जिस नेटवर्क को सुरक्षा एजेंसियाँ “सफेद कोट गुट” मान रही हैं, उसकी जड़ें लगभग पाँच वर्ष पीछे तक फैली हैं। इस गिरोह का हर व्यक्ति किसी न किसी हिस्से की कमान संभालता था, जबकि मुख्य संचालक डॉ. मुजफ़्फ़र अली राथर अब भी गिरफ्त से बाहर है और उसके संयुक्त अरब अमीरात में छिपे होने की आशंका है।

सूत्रों के अनुसार, इस गुट से जुड़े चिकित्सक लगभग तीन साल से घातक सामग्री इकट्ठी कर रहे थे। वे हर महीने नई ऑनलाइन चैट टीम बनाते थे और बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान, दुबई तथा सऊदी अरब जैसे देशों में मिलकर योजनाएँ पुख़्ता करते थे। इन सभाओं में पाकिस्तानी संपर्क भी सक्रिय रहते थे। उधर, कश्मीर में नौगाम थाना इलाका जाँच का प्रमुख बिंदु बन गया है। वहाँ बरामद हथियार, विस्फोटक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस पूरे प्रकरण की व्यापकता को दर्शाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि हमला किसी मॉल या बड़े भवन की पार्किंग में होता, तो नुकसान कई गुना बढ़ जाता। जाँचकर्ताओं के मुताबिक, मुफ़्ती मौलाना इरफ़ान इस तंत्र का शुरुआती और निर्णायक पात्र है। उसी के माध्यम से एक चयनित डिजिटल मार्ग पर डॉक्टरों और छात्रों तक उकसाने वाली सामग्री पहुँचती थी, जिससे उनमें प्रतिशोध की भावना बढ़ी। इस समूह के ज़्यादातर सदस्य पढ़े-लिखे चिकित्सा विशेषज्ञ थे, जिन्हें ऊँची तनख्वाह मिलती थी, फिर भी वे भटककर हिंसा की राह पर पहुँच गए।




