
रांची : चौकीय नहीं जनाब, यह कटु सत्य है कि वक़्त कितना बलवान होता हैं, और तकदीर कब अपनी ताकत दिखा जाए । इसे कोई नहीं जानता। झारखण्ड के मौज़ूदा मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन से बड़ा उदाहरण कौन हो सकता हैं?. समय की करवट और मुश्किल हालत किसी न किसी के लिए दरवाजा खोल देती है और उसके लिए नसीब का सूरज उग जाता है. सरल और विनम्र मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन जब प्रदेश की कमान संभाली तो किसी को यकीन नहीं था कि इंडिया गठबंधन और जेएमएम की ओर से सरायकेला विधायक चंपाई सोरेन सीएम बनेंगे.31 जनवरी की इस ठिठुरती भरी सर्द रात में ईडी ने हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया तो सवाल सिर उठाये हुए था कि आखिर अब राज्य की बागडोर कौन संभालेगा?. हेमंत सोरेन की वाइफ कल्पना सोरेन का नाम कई दिनों से चर्चा के साथ शोरगुल मचाये हुए था. लेकिन, जब ठंड भरी रात का अंधेरा छटा तो चंपाई सोरेन की जिंदगी का सबसे बड़ा उपहार मुख्यमंत्री की कुर्सी लेकर आया.चपाई सोरेन मुख्यमंत्री बने तो अपना काम शिद्दत से करते आ रहे हैं। पांच महीने के कार्यकाल और अभी भी उनकी सरकार ख़ामोशी,बगैर अड़चन और बेरोकटोक चल रही है . चंपाई सोरेन ने गद्दी पर बैठेते ही इसे हेमंत पार्ट -2 की सरकार कहा और राज सौपने पर आभारी जताया.वो इस बात को कह कर ये खुद जता गए कि ये हेमंत सोरन की ही सरकार है, वे तो बस नाम के और उनकी छाया हैं. ये बातें उनकी सफगोई और वफादारी ही जता रही ।.अब हेमंत सोरेन के जेल से रिहाई के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या चंपाई सोरेन बाकी बचे हुए कार्यकाल पूरा करेंगे?, क्योंकि अब विधानसभा चुनाव में तीन से चार महीने का ही समय शेष है. हालांकि, सच्चाई यहीं है कि चंपाई के सत्ता संभालने के बाद उतना हो हल्ला इस सरकार को लेकर नहीं हुआ. इस दौरान लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया और 5 सीटे जीती, वही जेएमएम ने भी 3 लोकसभा सीट जीतकर फायदे में रही. चपाई सोरेन को लेकर विपक्ष भाजपा भी उतने तेवर नहीं दिखाए जितना की हेमंत सोरेन के वक़्त हमलावर थी.अब चर्चा सियासी गलियारों में ये तेज़ है की चंपाई क्या मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाए जा सकते है?, क्योंकि हेमंत सोरेन ने 3 तारीख को बैठक बुलाई है और माना जा रहा है कि कोई बड़ा निर्णय ले सकते है. इसे लेकर, मुख्यमंत्री चंपाई ने 3 तारीख तक अपने सारे दौरे रद्द कर दिए हैं.आखिर इस बैठक में क्या होगा और क्या कदम आगे को लेकर उठाये जायेंगे?. इस पर सभी की नजर बनीं हुई हैं. सबसे बड़ा सवाल यहीं हैं कि क्या चंपाई सोरेन आगे सीएम बने रहेंगे या फिर हेमंत या उनकी वाइफ कल्पना बागडोर संभालेगी? खैर आगे जो भी हो, ये तो तय हैं कि अगर इंडिया गठबंधन एकबार फिर चुनाव जीतकर आती हैं तो चंपाई मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे. जेएमएम की तरफ से हेमंत सोरेन का नाम ही आगे आएगा.दरअसल, वो तो मुश्किल वक़्त और विपरीत हालात थे, जिसके चलते चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया गया. इसमे उनकी वफादारी और शिबू सोरेन परिवार के प्रति समर्पण का ही इनाम था जिसके चलते उनको इतनी ताकतवर कुर्सी मिली. इस बात को चंपाई भी जानते हैं कि वक़्त की जरुरत और मौक़े की नजाकत ने ही उनको सीएम के पद तक पहुंचाया. लिहजा, इससे हटने के बाद भी उन्हें इसका तनीक भी मलाल और इल्म नहीं होगा.बल्कि खुशी ही होगी की अपने सियासी सफ़र में इतने बड़े ओहदे और मुकाम तक पहुंचे.
चंपाई मजबूती के साथ सरकार चला रहें हैं और काम कर रहें हैं और आवाम के लिए सौगातों की झड़ी भी लगा रहें हैं. उन्होंने, कई योजनाएं और नौकरियां भी बांटी और घर से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं की सौगात भी दिल खोलकर दिया . कुल मिलाकर अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाने की भरसक कोशिश की. उनपर भ्रष्टाचार की तोहमत इस दरमियान अभी तक नहीं लगी हैं.अगर सही मायने में कहा जाए तो सीधे- सरल, सौम्य और शालीन चंपाई सोरेन एक्सीडेंटल सीएम ही हैं, वही दूसरी तरफ मुश्किल वक़्त में पार्टी के तारणहार ही हैं.जिन्होंने जेएमएम को खराब वक़्त में साथ देकर उबारा और एकबार फिर मुकाबले में लाकर खड़ा कर दिया. अब देखना यह हैं कि वह अपना बचा हुआ कार्यकाल पूरा करते हैं कि नहीं.
शिवपूजन सिंह






