रांची: सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं को लेकर इन दिनों एस्टीमेट (प्राक्कलन) में संभावित घोटाले की चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि कई योजनाओं में लागत का आकलन वास्तविक आवश्यकता से कहीं अधिक दर्शाया जा रहा है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण, नाली निर्माण, पेयजल व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं में तैयार किए गए एस्टीमेट में अनियमितता होने की चर्चा तेज हो गई है। जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से योजनाओं की लागत बढ़ाकर कमीशनखोरी का खेल चलाया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इन योजनाओं का सही तरीके से मूल्यांकन किया जाए तो कम लागत में बेहतर कार्य संभव है, लेकिन एस्टीमेट को जानबूझकर बढ़ाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इससे न केवल विकास कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंच रही है।

जनप्रतिनिधि और कुछ सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए राज्य के पदाधिकारी से उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं कराई गई तो यह घोटाला, बड़ा रूप ले सकता है। उन्होंने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। वहीं, नगर निगम के कुछ अधिकारियों का कहना है कि सभी योजनाएं निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत बनाई जाती हैं और एस्टीमेट तकनीकी मानकों के आधार पर तैयार किए जाते हैं। हालांकि, बढ़ती शिकायतों के बीच प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जांच कराए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को किस गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है या नहीं। फिलहाल, आदित्यपुर नगर निगम की योजनाओं में एस्टीमेट घोटाले की आशंका क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग निष्पक्ष जांच की उम्मीद कर रहे हैं।




