नई दिल्ली : लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए प्रस्तावित दो विधेयक, जो सोमवार को संसद में पेश किए जाने थे, अब टाल दिए गए हैं। लोकसभा की संशोधित कार्य सूची में इन विधेयकों का उल्लेख नहीं है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा ‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े इन विधेयकों को पेश किया जाना था। इस पहल का उद्देश्य देशभर में चुनावों को एकसाथ कराकर चुनावी खर्च और प्रशासनिक जटिलताओं को कम करना है। केंद्र सरकार ने इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था, जिसने विभिन्न हितधारकों से परामर्श के बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं। इन विधेयकों में से एक संविधान संशोधन विधेयक है, जो लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से संबंधित है। दूसरा विधेयक केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से जुड़ा है।

केंद्र सरकार ने समिति की सिफारिशों के आधार पर राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल समायोजित कर एक साथ चुनाव कराने का प्रस्ताव दिया है। इस योजना के तहत, राज्यों की वर्तमान विधानसभाओं का कार्यकाल छोटा कर एक समान चुनावी चक्र तैयार करने की बात कही गई है। इसके अलावा, पंचायत और नगर निकाय चुनावों को विधानसभा और लोकसभा चुनावों के तुरंत बाद आयोजित करने का भी सुझाव दिया गया है। यह पहल प्रभावी प्रशासन, चुनावी खर्च में कमी और शासन में स्थिरता लाने का उद्देश्य रखती है, लेकिन इसे लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद भी हैं। विधेयक की नई तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है।




