
रांची : (शिवपूजन सिंह )- सियासत वक़्त के साथ करवटे लेते रहती हैं. यह इसकी प्रकृति हैं, यह किसी से बंधकर और न ही किसी के शिकंजे में रहती हैं. वक़्त के साथ इसके रंग बिखरते रहते हैं. झारखण्ड में विधानसभा चुनाव भी दहलीज पर है, सियासी पार्टियां भी तमाम तरह की तैयारियों में जुटी हुई है. यहां भी सीधा मुकाबला एनडीए और इंडिया में है. इससे इतर कुछ फेरबदल भी देखने को मिल रही है. जेडीयू ने इसबार एनडीए के साथ मिलकर 11 सीट पर चुनाव लड़ने की बात कही है. ये बाते बिहार सरकार में मंत्री और जेडीयू नेता श्रवण कुमार ने बोली है की एनडीए फोल्डर में ही रहकर विधानसभा चुनाव लड़ेगी और 11सीटों पर दावेदारी जताएगी. आगे सीट शेयरिंग में किस -किस दल को कितना सीट मिलेगा, ये तो समय तय करेगा. अगर 11सीट जेडीयू को मिलती है और इधर आजसू के साथ गठबंधन होता है तो फिर बीजेपी को कही न कही बड़े भाई की भूमिका निभाकर त्याग करना होगा. जेडीयू की ताकत कभी झारखण्ड के वजूद में आने के बाद उफान पर थी. छह -छह विधायक और मंत्री भी हुआ करते थे. लेकिन समय का ऐसा पहिया घूमा की आहिस्ते -आहिस्ते कमजोर हो गई और आज एक भी विधायक तक नहीं है. मतलब पार्टी का सूपड़ा साफ है.पिछले 2019 विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने खिरू महतो की अगुवाई में 40 उम्मीदवार उतारे थे. लेकिन एक सीट भी जीत नहीं पाई थी. इसबार हलचल झारखण्ड के कद्दावर नेता और जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय के जेडीयू के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को लेकर हो रही है. माना जा रहा है कि भाजपा के पुराने नेता रहे सरयू राय के साथ सबकुछ ठीक रहा तो अपनी पार्टी भारतीय जनतंत्र मोर्चा का विलय जेडीयू के साथ भी कर सकते हैं. इसमे कोई शक नहीं हैं कि सरयू राय के आने से जेडीयू को एक ताकत और ऊर्जा मिलेगी. और कही न कही पार्टी का खाता भी खुलेगा. सरयू राय झारखण्ड की सियासत में एक नामचीन चेहरा और अपनी बेबाक बातों के लिए जाने जाते हैं, पिछले चुनाव में उन्होंने जमशेदपुर पूर्वी से बीजेपी से हटकर निर्दलीय चुनाव लड़ा और तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को करारी शिकास्त देकर राष्ट्रीय सुर्खिया बटोरी थी. रघुवर दास के सियासी करियर का तो ये सबसे बड़ा झटका था. आज भी सरयू राय की एक अलग राजनीतिक जमीन है और अब जेडीयू के साथ आने से उन्हें एक बल तो मिलेगा ही, इसके साथ ही जनता दल यूनाइटेड को भी खोई जमीन हासिल करने का मौका इस आगामी विधानसभा चुनाव में होगा. झारखण्ड में जेडीयू के साथ दिक्क़त ये है कि उसका जनाधार कभी अच्छा था, भाजपा के साथ चुनाव लड़ने पर उसे फायदा भी हुआ, लेकिन बीजेपी से अलग हटकर इलेक्शन लड़ने पर उसकी उतनी ताकत और वज़ूद कभी नहीं रही. झारखण्ड में जेडीयू के साथ विडंबना ये भी है कि कोई जनाधार वाला लीडर भी नहीं है, खिरू महतो के हाथों में कमान तो है, लेकिन, वो उतनी जमीन पार्टी के लिए नहीं बना पाए, जबकि अभी आई नई -नई पार्टी बनीं जयराम महतो की जेबीकेएसएस सभी दलो के लिए गले की हड्डी बन गई है, क्योंकि लोकसभा चुनाव में इस पार्टी ने अपना जोरदार असर दिखाया है. सरयू राय का भाजपा में आने का मन बार -बार करता आया है. उनकी बातों से भी ये झलकती रहती है. लेकिन, उनके लिए राह सजगार नहीं बन पाई. रघुवर दास के साथ पर्दे के पीछे उनकी अदावत कही न कही आज भी चल ही रही है. जेडीयू में सरयू राय के आने से ये होगा की गठबंधन के तहत भाजपा के करीब आ सकेंगे. एक तरह से जेडीयू की कमान उनके ही हाथ में झारखण्ड में होगी. दूसरी बात ये है कि नीतीश कुमार के साथ उनकी पुरानी दोस्ती भी है, लिहाजा उन्हें पार्टी में कोई रोक -टोक करने वाला नहीं है।
झारखण्ड जेडीयू की कमान दो लोग सरयू राय और खिरू महतो के हाथों में होगी.सबसे बड़ी दिक्क़त यहां सीट शेयरिंग को लेकर हो सकती है, क्योंकि जेडीयू 11सीट पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, लेकिन कितनी सीट गठबंधन के तहत मिलती है ये देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि आजसू भी इसबार साथ चुनाव लड़ेगी तो वो भी कुछ कम सीट से नहीं मानने वाली है. क्योंकि पिछले चुनाव में इसका खामियाजा भाजपा और आजसू दोनों भुगत चुकी है. जेडीयू के आने से लाजमी है कि गठबंधन के तहत कुछ न कुछ सीट बंटवारे में खटपट हो सकती है. झारखण्ड में जेडीयू और आजसू दोनों का वोट बैंक कही न कही कुर्मी महतो ही है. ऐसे में गठबंधन को साधना चुनौतीपूर्ण होने वाला है. सरयू राय के आने से जेडीयू में जान तो आ जाएगी. लेकिन उनके आने से पार्टी को कितना फायदा मिलता है. ये भी देखनेवाली बात होगी. सच्चाई ये भी है कि जेडीयू का कायाकल्प एनडीए के साथ चुनाव लड़ने में ही होगा. नहीं तो संभावना कम ही है कि कोई अप्रत्याशित सफलता पार्टी को मिलने जा रही है. मतलब यहां साफ यही है कि झारखण्ड में जेडीयू का भविष्य एनडीए के साथ रहकर ही उज्जवल होगा. सरयू राय जेडीयू के लिए इसमे एक बड़ा चेहरा साबित हो सकते है. हालांकि उनके लिए भी जेडीयू को खोई जमीन वापस करवाना एक चुनौती ही होगी।




