
रांची : झारखंड ,जमशेदपुर के टाटा स्टील द्वारा चौथा अखिल भारतीय दिव्यांग शतरंज टूर्नामेंट 2024 देशभर के 68 खिलाड़ियों के समूह के साथ आज से खेल शुरू हो गया है । यह आयोजन झारखंड में पहली बार टाटा स्टील के खेल विभाग द्वारा शारीरिक रूप से विकलांग शतरंज महासंघ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
आज से कुल 9 राउंड के मैच शुरू होंगे, जो 60 मिनट के समय के साथ और 30 सेकंड के वृद्धि के साथ खेले जाएंगे।
आज शतरंज के तीन राउंड खेले जाएंगे। उसके बाद अगले तीन दिनों तक दो-दो राउंड खेले जाएंगे। इस टूर्नामेंट में व्हीलचेयर, अनरेटेड, महिला, अंडर-19, जूनियर ओपन और गर्ल्स जैसी कई अन्य श्रेणियां भी है।
टूर्नामेंट की कुल पुरस्कार राशि 3,17,000 है।
टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट चाणक्य चौधरी ने कहा कि शतरंज एक ऐसा खेल है, जिसमें दिमाग में एक पूरी छवि खेल की उभरती है और इसमें छोटे-बड़े किसी भी आयु वर्ग के लोग अपने मस्तिष्क का पूरा उपयोग करते हैं। आज यह दिव्यांग इस प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। हमें बताना चाहते हैं कि इनके भी मस्तिष्क बहुत शार्प होते हैं और इन्हें एक साथ खेलने से एक प्रेम भाव और आपस में एक जुटता भी बनती है।
टाटा स्टील पिछले वर्ष भी विभिन्न वर्गों के शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किए थे, लेकिन दिव्यांगों के लिए पहली बार जमशेदपुर, झारखंड में किया जा रहा है। यह बातें सोमवार की शाम मोहन आहूजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहीं।
इस अवसर पर अर्जुन अवॉर्डी एवं भारत के तीसरे ग्रैंडमास्टर प्रवीण थिप्से ने कहा कि दिव्यांग के पास ज्यादा एक्टिविटी करने के लिए कोई और साधन नहीं है, लेकिन वह आराम से शतरंज खेल सकते हैं। उन्होंने कहा कि विजयवाड़ा के एक खिलाड़ी कार्तिक को हमने 2003 में प्रशिक्षण दिया था, आज 21 साल बाद वह शीर्ष पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि ये दिव्यांग जितने फेयर खेलते हैं, कोई चीटिंग नहीं करते हैं और इसके साथ ही साथ आपस में बंधुत्व भाव की भावना भी इन लोगों में उपजती है। जमशेदपुर।




