सरायकेला : सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ क्षेत्र में एक बार फिर अवैध बालू खनन और परिवहन को लेकर सुर्ख़ियों और चर्चाओं में है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार स्वर्णरेखा नदी के विभिन्न घाटों से रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर अवैध बालू का उठाव और परिवहन धड़ल्ले से किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है और क्षेत्र में पुराने विवादों की यादें भी ताजा होने लगी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी अवैध बालू खनन को लेकर बड़े विवाद हुए थे। मामला इतना गंभीर हुआ कि उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेकर प्रशासन के उच्च अधिकारियों से जवाब तलब किया था। अब एक बार फिर उसी तरह की परिस्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं, जिससे लोगों में चिंता और असंतोष बढ़ता जा रहा है। चांडिल सर्किल क्षेत्र के ईचागढ़, चांडिल, एवं अन्य क्षेत्रों में बढ़ते बालू की अवैध कारोबार के बीच ग्रामीण एक बार फिर से गुलबंद होने लगे हैं। छोटू झा नामक व्यक्ति की चर्चाएं जोरो से चल रही है, और कहा जा रहा है कि इसी व्यक्ति द्वारा सभी को मैनेज किया जाता है। इस व्यक्ति पर प्रशासन भी हाथ डालने से कतराती है , ऐसी चर्चाएं जोरों पर चल रही है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद देर रात लगभग एक बजे से सुबह छह बजे तक स्वर्णरेखा नदी के जारगोड़ी, सोड़ो और वीरडीह क्षेत्र से कथित रूप से अवैध बालू का उठाव बेखौफ धड़ल्ले से किया जा रहा है ।ग्रामीणों का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से संचालित हो रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रत्येक बालू लदे वाहन से लगभग ₹6,000 की अवैध वसूली की जाती है। यह भी चर्चा है कि 5999 नंबर श्रृंखला के तीन से चार वाहन प्रतिदिन जारगोड़ी से मिलन चौक तक कथित रूप से इन ट्रकों की निगरानी या एस्कॉर्ट करते देखे जाते हैं। लेकिन इन दावों की हकीकत क्या है यह जांच के बाद ही खुलासे हो सकते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार आदित्यपुर के हिमांशु हत्याकांड के समय यहां बालू के अवैध कारोबार बंद हो गए थे। जैसे ही मामला ठंडा हुआ ,फिर बेखौफ धड़ल्ले से शुरू हो गए हैं।
इस पूरे मामले पर theराष्ट्रीय न्यूज़ ने कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा से बात की तो, उन्होंने ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए ,देखने और कार्रवाई करने की बातें कहीं।






