मीना देवी दिल्ली : मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके चेहरे, वेशभूषा या पद से नहीं, बल्कि उसकी वाणी और व्यवहार से होती है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के संस्कार, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का जीवंत परिचय होती है। भाषा एक ऐसा वस्त्र है ,जिसे शालीनता से नहीं पहना जाए तो, आपका संपूर्ण व्यक्तित्व ही निर्वस्त्र हो जाता है। बोलना और प्रतिक्रिया करना जरूरी है। लेकिन संयम और, सभ्यता का दामन नहीं छूटना चाहिए, यह भी उतना ही सत्य है, जितना की व्यक्तित्व के निखरते विचार । स्पष्टीकरण वहां देना चाहिए, जहां उसे सुनने और समझने वाला एक खुला व्यक्तित्व हो ,अगर किसी ने आपको गलत मान लिया है तो, उस पर सफाई देने का मतलब खुद को खुद की नजरों से गिराना है। जिससे व्यक्ति के विचार व्यक्तित्व पर गहरा असर पड़ता है। जिस व्यक्ति की भाषा में विनम्रता, मधुरता और शालीनता होती है, वह बिना किसी विशेष प्रयास के लोगों के हृदय में सम्मान और विश्वास का स्थान बना लेता है। वास्तव में, शब्दों का चयन ही यह बताता है कि व्यक्ति का चिंतन कितना परिपक्व और उसका व्यक्तित्व कितना गरिमामय है।
शालीन भाषा का अर्थ केवल मीठे शब्द बोलना नहीं, बल्कि प्रत्येक परिस्थिति में संयम, धैर्य और संवेदनशीलता बनाए रखना होता है। मतभेद होना स्वाभाविक है, किन्तु मनभेद न हो, इसके लिए भाषा की मर्यादा आवश्यक है। कठोर शब्द जहाँ रिश्तों में दूरियाँ पैदा कर देते हैं, वहीं मधुर और सम्मानपूर्ण वाणी टूटे हुए संबंधों में भी विश्वास पैदा कर देते हैं। इसलिए भारतीय संस्कृति में वाणी को अमूल्य धरोहर माना गया है।

आज जब सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दायरा बढ़ा है, तब भाषा की शालीनता का महत्व और भी अधिक हो गया है। असहमति व्यक्त करना लोकतंत्र की शक्ति है, परंतु अपमानजनक भाषा का प्रयोग किसी भी सभ्य समाज की पहचान नहीं हो सकता। विचारों की दृढ़ता के साथ शब्दों की मर्यादा ही व्यक्ति को विशिष्ट बनाती है।
हमें सदैव यह स्मरण रखना चाहिए कि बोलने से पहले शब्दों का चयन अवश्य करें, क्योंकि निकले हुए शब्द लौटकर वापस नहीं आते। मधुर, संयमित और सम्मानजनक भाषा न केवल हमारे व्यक्तित्व को ऊँचा उठाती है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र में सौहार्द, विश्वास और सकारात्मक वातावरण का निर्माण भी करती है। वास्तव में, व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान उसके चेहरे की सुंदरता नहीं, बल्कि उसकी भाषा की शालीनता होती है। शालीन वाणी ही श्रेष्ठ व्यक्तित्व की सबसे सुंदर पहचान और सच्चा व्यक्तित्व का विचार होता है। जिससे आप गैरों को भी अपना बना लेते हैं।






