रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त पारा शिक्षकों के हित में अहम निर्णय देते हुए कहा है कि नियमित नियुक्ति से पहले पारा शिक्षक के रूप में बिताया गया कार्यकाल भी पेंशन की गणना में शामिल किया जाएगा। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने 44 सेवानिवृत्त इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षकों की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को उनकी संपूर्ण सेवा अवधि का पुनर्मूल्यांकन करने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित शिक्षकों की सेवा की गणना पारा शिक्षक के रूप में पहली नियुक्ति की तिथि से होगी। इसी आधार पर पेंशन, ग्रेच्युटी तथा अन्य सेवानिवृत्ति देयकों की नई गणना कर आदेश की प्रति प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर भुगतान किया जाए। साथ ही सेवानिवृत्ति की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देने का निर्देश दिया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि शिक्षकों ने लंबे समय तक शिक्षा विभाग में निरंतर योगदान दिया और बाद में विधिवत चयन प्रक्रिया के माध्यम से नियमित सेवा में आए। ऐसे में उनकी पूर्व सेवाओं की अनदेखी करना उचित नहीं है। अपने निर्णय में हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के Prem Singh, Sheela Devi तथा S.D. Jayaprakash मामलों में स्थापित सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि नियमित नियुक्ति से पूर्व की पात्र सेवा को भी पेंशन लाभों के निर्धारण में महत्व दिया जाना चाहिए।






