रांची : उत्तर प्रदेश में अचल संपत्ति के पंजीकरण की प्रक्रिया अब पहले की तुलना में अधिक नियंत्रित और निगरानी वाली हो गई है। राज्य सरकार ने घर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और भूमि के क्रय-विक्रय में कर पहचान संख्या को अनिवार्य रूप से जोड़ने का प्रावधान लागू किया है। इस कदम का उद्देश्य आर्थिक अनियमितताओं पर रोक लगाना और देश की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को कम करना है।
निबंधन विभाग की महानिरीक्षक नेहा शर्मा ने सभी जिलों के अधिकारियों को इस व्यवस्था का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। इस निर्णय की पृष्ठभूमि में नेपाल से सटे जिलों में संपत्ति सौदों में आई असामान्य वृद्धि एक प्रमुख कारण रही है। प्रशासनिक जांच में सामने आया कि इन इलाकों में बड़े पैमाने पर संदिग्ध धन का उपयोग किया जा रहा था।

इसी को ध्यान में रखते हुए अब पंजीकरण से पहले सभी पक्षों की कर पहचान संख्या की डिजिटल जांच अनिवार्य कर दी गई है। ऑनलाइन आवेदन प्रणाली में भी यह विवरण देना जरूरी होगा।प्रदेश सरकार पहले ही पहचान पत्र को पंजीकरण प्रक्रिया से जोड़ चुकी है और अब यह नया नियम उसी कड़ी का हिस्सा है। विभागीय मंत्री रवींद्र जायसवाल के अनुसार, डिजिटल प्रमाणों के बिना पारदर्शिता संभव नहीं है। इस बदलाव से अवैध धन या छिपी हुई आय के जरिए निवेश करने वालों के लिए रास्ते बंद होंगे। सरकार का उद्देश्य है कि राज्य का रियल एस्टेट क्षेत्र भरोसेमंद, स्पष्ट और सुरक्षित बने।




