जमशेदपुर ( आनंद राव ) : वाद्ययंत्र के बिना संगीत अधूरी है और उसका निर्माण करने वाले शिल्पकार वर्षों से जमशेदपुर में परिवार पालने के लिए सड़क किनारे संघर्ष कर रहे है। कहा जाता है कि जिस वाद्ययंत्र का निर्माण किया जाता है उसमें चमड़े का उपयोग होता है इस लिए संगीत उत्पत्ति काल से ही चमार समाज के लोग ही इसका निर्माण करते आ रहे जो इनके परिवार के लिए रोजगार का साधन भी है। वैसे राजा महाराजाओं के समय में संगीतकार और शिल्पकारों की अलग ही महत्व और सम्मान होती थी।
कहा यह भी जाता है कि विलुप्त होते शास्त्रीय संगीत को बचाने में इनका भी काफी योगदान है,लेकिन आज के इंटरनेट और तकनीकी काल में इन्हें अपने ही अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम प्रखंड के अंधारझोर गांव के लगभग 100 परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हुए है, जिनके द्वारा जमशेदपुर के साकची स्टेट माईल रोड संजय मार्केट के समीप वर्षों से खुले आसमान के नीचे इस वाद्ययंत्र की बिक्री कर परिवार का भरण पोषण करते आ रहे है। वहीं वर्षों बाद शिल्पकारों के लिए बनाए गए योजना के तहत जिला प्रशाशन ने इनके लिए विश्वकर्मा प्वाइंट के नाम से दुकान बना कर दी गई। जिसका तत्कालीन उपायुक्त मंजुनाथ भजेंद्री ने 2023 में समारोह आयोजित कर उद्घाटन की थी।

जिसे लेकर शिल्पकार काफी खुश थे। जिसके बाद इन शिल्पकारों ने अंधारझोर वाद्य यंत्र शिल्पकार औद्योगिक सहयोग समिति लिमिटेड का गठन कर सरकार और जिला प्रशासन से स्थाई दुकान देने की मांग की गई जिसके आलोक में जिला प्रशासन ने अनुमति प्रदान करते हुए वर्तमान समय में उस स्थल पर दो मंजिला दुकान का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन इस दौरान प्रशाशन द्वारा उनकी विश्वकर्मा प्वाइंट को रातों रात ध्वस्त कर वाहनों की पार्किंग की जाने लगी है, जिससे एक बार फिर ये शिल्पकार खुले आसमान के नीचे सड़क पर आ गए। प्रशाशन के इस रुख के खिलाफ कई बार उपायुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को शिकायत की गई लेकिन निदान की कोई पहल नहीं हों पाई है। इसे लेकर शिल्पकारों और संस्था के अध्यक्ष विशाल दास ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पक्का दुकान का सपने दिखाकर सड़क पर ला देना ये कितना न्यायोचित है।सरकार और प्रशाशन के उदासीनता रवैए के कारण कई शिल्पकार रोजी रोटी की तलाश में अपने संस्कृति को छोड़ मजदूरी करने के लिए मजबूर हो गए है। अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि प्रशाशन अविलंब उनकी मांगो पर पहल नहीं करती है तो शिल्पकार अपने वाद्ययंत्र और पूरे परिवार के साथ उपायुक्त कार्यालय के मुख्य गेट के समीप प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जाएंगे।






