जमशेदपुर : जमशेदपुर में पिछले कुछ दिनों से प्रशासन द्वारा नो पार्किंग के लिए चलाए जा रहा अभियान एक आंख में सुरमा एक आंख में काजल जैसा है,जो शहर वासियों के लिए आई वाश जैसा प्रतीत हो रहा है। जिसे लेकर शहरवासी,प्रशासन के भेद भावपूर्ण रवैया पर नाराजगी है।बता दे कि जमशेदपुर शहर की कुछ ऐसा क्षेत्र जहां हमेशा ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है जिसमें सबसे पहले मानगो पुल जाम की समस्या से जूझ रहा है वही साकची गोल चक्कर,बिष्टुपुर और जुगसलाई में भी जाम से लोग प्रतिदिन रूबरू होते हैं। लेकिन पिछले एक सप्ताह से ट्रैफिक पुलिस के बजाय SDO शताब्दी मजूमदार जाम से मुक्ति दिलाने के लिए कमर कस कर सड़क पर उतर आई है, लेकिन उनकी यह करवाई जुबली पार्क के समीप ज्यादा देखने को मिल रहा है, जहां लोग सड़क किनारे वाहन लगाने पर या तो दो पहिया वाहन जब्त कर ली जाती है या फिर फोटो खींचकर ऑनलाइन फाइन भेज दिया जाता है,जबकि उसी क्षेत्र में चार पहिया वाहन सड़क पर खड़े रहने के बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है जो कई सवाल खड़ी करती है।इसी तरह स्टेट माईल रोड पत्ता मार्केट के समीप दोनों छोर पर सैंकड़ों दुपहिया वाहन पार्किंग किए जाने के वजह से अक्सर जाम लगा रहता है जिसे रोकने की जहमत नहीं की जाती ,जहां कार्रवाई को लेकर नजर अंदाज किया जा रहा है,ऐसी ही स्थिति साकची बड़ा गोलचक्कर में ट्रैफिक पुलिस के नाक के नीचे ठेला खामोचे ,ऑटो खड़ी कर पैसेंजर चढ़ाया जाता है।

जिससे ट्रैफिक जाम हो जाती है,लेकिन पुलिस की नजर सिर्फ हेलमेट चेकिंग और फाइन काटने में मस्त है उन्हें जाम से कोई मतलब नहीं,या यूं कहे पैसेंजर चढ़ाने के लिए टेंपो वाले से और आधी सड़क तक ठेला लगाने वाले से कमीशन फिक्स किया हुआ है,यही वजह है कि ट्रैफिक डीएसपी की नजर भी उस ओर नहीं जाती है। लोगो का यह भी मानना है कि ऐसी क्या वजह है कि जो कार्य ट्रैफिक पुलिस को करनी चाहिए उसे sdo को सड़क पर उतर कर करना पड़ रहा है।जो अभियान एक आंख में काजल और एक आंख में सुरमा जैसा प्रतीत हो रहा है।




