दिल्ली (प्रतिक सिंह) : आज के डिजिटल युग में दोस्ती बनाना पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।सोशल मीडिया ने हमें सैकड़ों लोगों से जोड़ दिया है, लेकिन भावनात्मक नजदीकी घटती जा रही है। ऑक्सफोर्ड के प्रोफेसर रॉबिन डनबर के अनुसार, मानव मस्तिष्क केवल सीमित संबंधों को ही सार्थक रूप से संभाल सकता है।

इसके बावजूद, हम वर्चुअल मंचों पर अनगिनत संपर्क रखते हैं, जिनमें गहराई की कमी रहती है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जब हम अपना समय और ध्यान बहुत से परिचितों में बाँट देते हैं, तो मजबूत बंधन बनाना कठिन हो जाता है। सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहने से संवाद सतही रह जाता है — हम बातचीत करते हैं, पर असल जुड़ाव नहीं होता। यही कारण है कि जुड़ाव के बावजूद अकेलापन बढ़ा है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की एक रिपोर्ट बताती है कि पिछले बीस वर्षों में लगभग एक-तिहाई लोग खुद को अधिक एकाकी महसूस करने लगे हैं। वास्तविक मित्रता के लिए जरूरी है कि हम समय, संवेदना और भरोसा दें — न कि केवल लाइक्स या कमेंट्स। डिजिटल भीड़ में सच्चा साथी वही होता है जिसके साथ हम दिल से जुड़ सकें, न कि सिर्फ प्रोफाइल से।




