रांची : झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में अवैध शराब का कारोबार अब ‘कुटीर उद्योग’ का रूप ले चुका है। हालात ये हैं कि बीते 3 साल में जिले के 3 उत्पाद अधीक्षकों का तबादला हो गया, लेकिन दरोगा तीन सालों से जमे हुए हैं उनका तबादला नहीं हुआ। जो कई सवालों का जन्म देता हैं। बड़ा सवाल यही उठ रहा है — क्या इनकी पहुंच-पैरवी बड़े अधिकारियों पर भारी पड़ रही है? जिले भर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
*जमे हुए दरोगा, बदलते अधीक्षक — सिस्टम पर सवाल*
स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि उत्पाद विभाग में ऊपर के अधिकारियों के तबादले तो समय और समय से पहले हो जाते हैं, मगर फील्ड में कार्रवाई करने वाले दरोगा बरसों तक नहीं बदले जा रहे हैं। नतीजा — शराब माफियाओं से ‘सेटिंग’ मजबूत होती गई और छापेमारी महज औपचारिकता बनकर रह गई। चर्चा है कि जब भी बड़ी कार्रवाई होती है, माफियाओं तक पहले ही सूचना लीक हो जाती है। टीम पहुंचे, उससे पहले ही भट्ठी खाली, धंधेबाज फरार हो जाते हैं।

*कहाँ-कहाँ फैला है अवैध शराब का जाल*
जिले के लगभग हर थाना क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। उत्पाद विभाग की फाइलों में छापेमारी दर्ज है, मगर जमीन पर हालात जस के तस हैं:
*1. आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र*
झुग्गी-झोपड़ियों से लेकर मेन रोड तक खुलेआम शराब की बिक्री और सप्लाई हो रही है। टाटा-कांड्रा सर्विस रोड पर तो हाल ये है कि सरकारी शराब दुकान के सामने ही ग्राहकों को बैठाकर पिलाई जा रही है। स्थानीय लोगों को किसी बड़ी घटना की आशंका सता रही है। दिल्ली बाजार में कन्या मध्य विद्यालय के बगल में भी बिक्री की शिकायतें लगातार आ रही हैं। निमाई पाड़ा में भी कारोबार बेरोक-टोक जारी है।
*2. सीतारामपुर डैम और भुआ जंगल*
यहां दाखिन बेसरा और डोमा मांझी के नाम से चलने वाली अवैध भट्ठियों को उत्पाद विभाग ने तोड़कर ध्वस्त किया था। मगर कार्रवाई के चौथे दिन ही धंधा फिर शुरू हो गया। यह सीधे-सीधे विभाग और प्रशासन को चुनौती है।
*3. वास्को नगर और आदित्यपुर*
वास्को नगर में गोस्वामी नामक व्यक्ति द्वारा बड़े पैमाने पर सप्लाई का काम खुलेआम चल रहा है। प्रशासन मूकदर्शक बना है।
*4. कांड्रा थाना क्षेत्र*
हैप्पी लकी ढाबा के पीछे केसर के पास एक घर से पहले तीन महंगी गाड़ियां और 10 लाख की शराब जब्त हुई थी। एफआईआर भी हुई, मगर वही गिरोह फिर सक्रिय हो गया है। बुरुडीह गांव में 15 से 20 घरों में रोज शराब बनाकर मंडल और सरदार नाम के सप्लायरों द्वारा बड़े पैमाने पर खपाई जा रही है।
*5. गम्हरिया थाना क्षेत्र*
उकाम गांव, गांडे डूंगरी, घातकीडीह, कमलपुर, बिंदापुर में चुलाई की भट्ठियां जो बंद कराई गई थीं, वो फिर से धधकने लगी हैं।
*6. राजनगर, सरायकेला, चौका थाना क्षेत्र*
राजनगर के मुराकाटी, मंजगांव के टोला जोजोबेरा स्थित जंगल में अवैध अड्डे फिर चालू हैं। सरायकेला के हाथीमारा गांव में माफिया फिर सक्रिय हैं। चौका के हेसाकोचा में तोड़ी गई भट्ठियां दोबारा शुरू हो गईं। कुछ दिन पहले ही चौका के मिरूडीह में पंजाब निर्मित विदेशी शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई थी, जिसके बाद थाना चर्चाओं में रहा।
*7. चांडिल और रायबासा क्षेत्र*
चांडिल के भादूडीह में नकली अंग्रेजी शराब की फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ था। कार्रवाई के बाद कुछ दिन शांति रही, फिर धंधा खुलेआम शुरू हो गया। रायबासा इलाके में भी बड़े पैमाने पर अवैध शराब का कारोबार जारी है।
*‘आईवॉश’ बनकर रह गई छापेमारी*
उत्पाद विभाग के अधिकारी कभी-कभार जनता को दिखाने के लिए छापेमारी करते हैं। टीम निकलती है, लेकिन माफिया पहले ही सतर्क हो जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि विभाग के अंदर से ही सूचना लीक हो जाती है। छापे में टूटी भट्ठियां दो-चार दिन में फिर खड़ी हो जाती हैं। दर्ज होने वाली एफआईआर में ज्यादातर ‘फरारी’ दिखाए जाते हैं, गिरफ्तारी न के बराबर होता है।
बीते दिनों उत्पाद विभाग की टीम ने कई जगहों पर शराब जब्त कर फरारी का केस दर्ज किया था। मगर हफ्तेभर बाद ही उन्हीं ठिकानों पर फिर से काम शुरू हो गया। इससे माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और वे खुलेआम प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं।
*स्कूल, हाईवे, रिहायशी इलाके — कहीं भी बिक्री*
सबसे चिंताजनक बात ये है कि अवैध शराब का कारोबार स्कूलों के आसपास, हाईवे के किनारे और घनी रिहायशी बस्तियों में भी बेधड़क चल रहा है। कन्या मध्य विद्यालय के पास बिक्री, सर्विस रोड पर खुलेआम पिलाना, ढाबों के पीछे गोदाम बनाना — ये सब दिखाता है कि माफियाओं को कानून का कोई डर नहीं है। स्थानीय लोग दबी जुबान में कहते हैं कि बिना ‘मंथली’ और संरक्षण के ये संभव नहीं है।
*उत्पाद आयुक्त और उपायुक्त से उम्मीद*
जिले की जनता अब उत्पाद आयुक्त और सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त की तरफ देख रही है। लोगों का कहना है — ‘काश, बड़े अधिकारी , वर्षों से जमे फील्ड अधिकारियों दरोगा को हटाते,खुद एक नजर इन चर्चित जगहों पर डालते।




