झारखंड : जिले में नए साहब के आते ही एक बार फिर पूर्व के कुछ तथाकथित “करीबी” सक्रिय हो गए हैं। गलियारों में चर्चा है कि ये लोग हर हाल में साहब तक अपनी पहुंच दिखाने और खुद को उनका सबसे विश्वासपात्र साबित करने की होड़ में लगे हैं। सवाल यह है कि क्या यही लोग आने वाले दिनों में नए साहब की छवि पर भी दाग लगने का कारण बनेंगे?अतीत गवाह है कि कई अधिकारी अपनी कार्यशैली से नहीं, बल्कि अपने आसपास मंडराने वाले दलालों और कथित शुभचिंतकों की वजह से विवादों में घिरे और बदनाम रहते हैं।
जबकि उन अधिकारी को इसका उन्हें अंदाजा भी नहीं रहता,या जानते हुए भी अनजान रहते हैं। अधिकारी के नाम पर वसूली, अवैध कारोबार को संरक्षण देने के आरोप और मनमानी सिफारिशों का खेल लंबे समय तक चर्चा का विषय रहता है। नुकसान केवल व्यवस्था का नहीं होता है, बल्कि उन अधिकारियों की साख भी गिरती है ,और दांव पर लगती है। ,फिर वही चेहरे, वही तौर-तरीके और वही “सेटिंग” की चर्चाएं, चर्चाओं में जोरो से चल रही हैं। यदि इन चर्चाओं में जरा भी सच्चाई है, तो यह नए साहब के लिए गंभीर बातें है।

एक ईमानदार अधिकारी की पहचान उसके अपने निर्णयों से होती है। साहब को यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि साहब का नाम लेकर किसी भी प्रकार की वसूली, पैरवी, दबाव या अवैध कारोबार करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे लोगों पर साहब के सख्त कार्रवाई ही प्रशासन की विश्वस्नीयता को बरकरार रखेगा। जनता की भी निगाहें नए साहब पर हैं। उम्मीद यही है कि वे अपने नाम का दुरुपयोग करने वाले तत्वों को पहचानेंगे, उनसे दूरी बनाएंगे और यह साबित करेंगे कि कानून से ऊपर कोई नहीं। तभी प्रशासन की साख बचेगी और यह संदेश जाएगा कि व्यवस्था व्यक्ति की नहीं, बल्कि नियमों से चलती है। यह साहब का संदेश सेटिंग और उम्मीद पर पानी फेरने के लिए काफी हैa






