रांची : बढ़ रही लगातार आपराधिक घटनाओं और गिरती कानून-व्यवस्था के विरोध में आहूत बंद को मिला जन समर्थन, जनआक्रोश का बड़ा प्रतीक बनकर सामने आया है । बंद को आम जनता, व्यापारी वर्ग, बुद्धिजीवी वर्ग, सामाजिक संगठनों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों का अभूतपूर्व समर्थन मिला है। सुबह से ही शहर के अधिकांश बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के शटर स्वेच्छा से गिरा दिए । लोगों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर यह संदेश दिया कि अपराध और भय के माहौल के खिलाफ समाज अब एकजुट हो रहा है।
बंद के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। जनप्रतिनिधियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आम नागरिकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और कानून-व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग करते हुए अपराधियों पर लगाम लगाने की बात कही । पुलिस के कड़े प्रबंध रहे चप्पे-चप्पे पर मजिस्ट्रेट और पुलिस पदाधिकारी पुलिस बल तैनात रहे। राज्य एवं जिले के वरीय पदाधिकारी प्रदर्शनों पर लगातार निगरानी और निगाहें बनाए रहे ।

इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का जनाआक्रोश का विस्फोट फुट पड़ा। प्रदर्शनकारी लगातार हो रही हत्या, लूट, रंगदारी और अन्य आपराधिक घटनाओं से निजात दिलाने की मांग कर रहे थे। आम लोगों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। यदि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
व्यापारी वर्ग ने कहा कि भय के माहौल में व्यापार करना कठिन होता जा रहा है। अपराधियों का बढ़ता मनोबल न केवल कारोबार बल्कि आम जनजीवन के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी रणनीति अपनाने, पुलिस की सक्रियता बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ त्वरित एवं कठोर कार्रवाई की मांग की।

बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन जनता का आक्रोश साफ़ साफ दिखाई दिया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य किसी को असुविधा पहुंचाना नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन का ध्यान बिगड़ती कानून-व्यवस्था की ओर आकर्षित करना है। लोगों ने उम्मीद जताई कि इस व्यापक जनसमर्थन और जनभावना को गंभीरता से लेते हुए सरकार अपराध नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाएगी, ताकि आम नागरिक भयमुक्त वातावरण में जीवनयापन कर सकें। शहर में बंद को मिला व्यापक समर्थन यह संकेत देता है कि कानून-व्यवस्था अब केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आम जनता की सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है। साहब अब जनता जाग चुकी है, लगता है ,अब कानून व्यवस्था में परिवर्तन होगा। यह तो अब आने वाला वक्त ही बताएगा।






