रांची : पूर्व रिम्स प्रमुख डॉ. राजकुमार ने उच्च न्यायालय में एक अर्जी दाखिल करते हुए कहा है कि उन्हें बेबुनियाद आरोपों के आधार पर उनके पद से हटाया गया, जो रिम्स के 2002 के नियमों और प्राकृतिक न्याय की अवधारणा का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि निदेशक की नियुक्ति तीन वर्षों के लिए होती है और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सभी प्रक्रियाओं का पालन किया। डॉ. राजकुमार का दावा है कि उन्होंने पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया और किसी भी प्रकार की अनियमितता में शामिल नहीं थे।

बीते सप्ताह जनरल बॉडी की बैठक के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया था, जिसके बाद डॉ. राजकुमार ने पद त्यागने की बात कही थी। इसके तुरंत बाद, सरकार ने उन्हें पदमुक्त करने का निर्णय लिया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी वक्तव्य में उनके हटाए जाने का कारण बताया गया कि उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में रुकावट डाली, नियमों की अवहेलना की और राज्य व कैबिनेट के आदेशों का अनुपालन नहीं किया। डॉ. राजकुमार ने इन सब आरोपों को निराधार बताया है और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उनकी प्रतिष्ठा बहाल हो सके।




