रांची : मुख्य सचिव अलका तिवारी ने नशे के कारोबार और पोस्ते की खेती पर रोक लगाने के लिए अफसरों को कड़े निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को आयोजित बैठक में उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पोस्ते की खेती से जुड़े लोगों को जागरूक करें और उन्हें वैकल्पिक आजीविका प्रदान करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि पोस्ते की खेती पर रोकथाम के लिए वन विभाग, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा। सीएस ने यह भी बताया कि अधिकतर पोस्ते की खेती जंगलों और जलाशयों के पास होती है। इसके लिए वन विभाग को ऐसे स्थलों की पहचान कर कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कहा कि इन फसलों को नष्ट करने के साथ-साथ दोषियों पर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा, पंचायती राज और शिक्षा विभागों को भी इस अभियान में शामिल करने का सुझाव दिया गया, ताकि स्थानीय समुदायों को जागरूक किया जा सके। बैठक में चतरा, खूंटी, हजारीबाग, लातेहार, पलामू, रांची, चाईबासा और सरायकेला-खरसावां जैसे प्रभावित जिलों के पुलिस अधीक्षकों और उपायुक्तों ने अपनी कार्रवाईयों की जानकारी दी।

एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज) ने एक पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से नशे के कारोबार के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और रोकथाम के लिए उपाय सुझाए। गृह सचिव वंदना दादेल और डीजीपी अनुराग गुप्ता ने भी इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए। बैठक में पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे और वन सचिव अबू बकर सिद्दिकी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस समन्वित प्रयास का उद्देश्य न केवल पोस्ते की खेती को रोकना है, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को स्थायी आजीविका प्रदान करना भी है।




