जमशेदपुर:जमशेदपुर के भुइंयाडीह में 26 नवंबर को न्यायालय का आदेश के बाद जिला प्रशासन और टाटा स्टील ने संयुक्त रूप से अभियान चलाकर सड़क किनारे अतिक्रमित कर बसे दर्जनों घरों और दुकानों को तोड़ दिया गया था, इसे लेकर शनिवार को पीड़ित परिवार केंद्रीय बस्ती विकास समिति के बैनर तले जिला उपायुक्त कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करने पहुंचे।पीड़ित परिवार का कहना था कि वे लोग जब क्षेत्र में मुख्य सड़क और श्मशान घाट भी नहीं था तब से वहां झुग्गी झोपड़ी बनाकर रहते आ रहे हैं।
शमशान घाट बनने के दौरान भी वे लोग देखभाल का कार्य करते थे। अब जब क्षेत्र पूरी तरह से व्यवस्थित हो गया तो उन्हें बिना नोटिस दिए टाटा स्टील और जिला प्रशासन ने अचानक धावा बोलकर दर्जनों घरों और दुकानों को तोड़कर उन्हें इस ठंड में बेघर कर दिया।इन पीड़ितों में साफ नाराजगी देख रही थी और उनके बयां में भी दर्द झलक रहा था कि आज समिति के केंद्रीय अध्यक्ष दुलाल भुइंया के नेतृत्व में भले ही वे लोग आज यहां मौजूद है लेकिन तोड़फोड़ के दिन वे भी अन्य नेताओं और क्षेत्र के विधायक की तरह खुद मौजूद नहीं थे। उनकी मजबूरी है कि अपनी हक की मांग को लेकर उनके साथ आज उपायुक्त के समक्ष गुहार लगाने आना पड़ा है।

पीड़ितों ने तो यह भी कहा कि क्षेत्र के विधायक पूर्णिमा दास साहू जब चुनाव लड़ रही थी तो वे लोग उसके साथ घर-घर जाकर उनके पक्ष में वोट मांग कर जीत दिलाई,अब जब उनका आशियाना टूट रहा था तो वह तोड़फोड़ रोकने का प्रयास तक नहीं की, जबकि दूसरे दिन सहानुभूति जताने पहुंची थी, ऐसे में अब अगला चुनाव के लिए बस्ती वासी सोचने पर मजबूर है। इधर दुलाल भुइंया ने भी कहा कि वे उस दिन कोर्ट में तारीख होने के कारण मौजूद नहीं थे। उन्होंने इस कार्रवाई को न्यायलय के आदेश से इनकार किया है उनका आरोप है कि ये सब जिला प्रशाशन और टाटा स्टील ने मनगढ़ंत कहानी गढ़ कर यह कार्रवाई की है।जिसे लेकर वे हाई कोर्ट के शरण में जाएंगे। बहरहाल उपायुक्त ने आश्वस्त किया है कि वे जांच कर वस्तुस्थिति से अवगत होंगे और जो भी पीड़ित है उन्हें उचित सहायता प्रदान की जाएगी।




