रांची : प्रदेश में एक बार फिर मुख्यमंत्री जन संवाद कार्यक्रम को शुरू करने की मांग तेज हो गई है।जनता और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह कार्यक्रम जनता और सरकार के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का सबसे प्रभावी माध्यम था, जिसके माध्यम से आम नागरिक अपनी समस्याएँ, सुझाव और शिकायतें सीधे मुख्यमंत्री तक पहुँचा सकते थे। पिछले कुछ समय से इस कार्यक्रम का आयोजन नहीं होने के कारण लोगों में निराशा का माहौल है, और अब वे इसके पुनः आरंभ की उम्मीद कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री जन संवाद की शुरुआत जनता की भागीदारी को बढ़ाने और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्वयं लोगों की बातें सुनते थे, विभिन्न विभागों के अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश देते थे, और कई मामलों में तत्काल समाधान भी किया जाता था। इससे न केवल आम जनता को राहत मिलती थी, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती थी। जनता का कहना है कि इस संवाद से शासन और जनता के बीच की दूरी काफी कम हुई थी। ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, युवाओं और महिलाओं की समस्याएँ सीधे मुख्यमंत्री के संज्ञान में आती थीं। वहीं, कई योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं का समाधान भी इस संवाद के माध्यम से संभव हुआ था।

अब जब कार्यक्रम बंद है, तो लोग अपनी समस्याएँ लेकर इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों से आई मांगों के बाद सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार से अपील की है कि इस कार्यक्रम को जल्द दोबारा शुरू किया जाए। उनका कहना है कि जन संवाद जैसी पहलें लोकतंत्र को मजबूत करती हैं और शासन को संवेदनशील बनाती हैं। डिजिटल युग में इस कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी साधनों का भी उपयोग किया जा सकता है, ताकि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। जनता की बढ़ती अपेक्षाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता की जरूरत को देखते हुए यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री जन संवाद जैसे कार्यक्रमों का पुनः आरंभ न केवल जनता का विश्वास बढ़ाएगा, बल्कि शासन-प्रशासन को भी अधिक जवाबदेह और जनोन्मुख बनाएगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मांग पर कब तक सकारात्मक निर्णय लेती है।





