नई दिल्ली : केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंगलवार को लोकसभा में 129वें संविधान संशोधन विधेयक को पेश किया, जो “एक देश, एक चुनाव” की अवधारणा को लागू करने के लिए लाया गया है। इस विधेयक के साथ केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े तीन कानूनों में संशोधन प्रस्तावित हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की संभावना भी शामिल है। विपक्ष ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इसे संविधान के मूल ढांचे पर हमला बताया और कहा कि यह विधेयक संसद के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने इसे भारत के संघीय ढांचे के खिलाफ बताया और इसे वापस लेने की मांग की। समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने इसे तानाशाही की ओर ले जाने वाला कदम करार दिया और व्यंग्य करते हुए कहा कि जो सरकार दो राज्यों के चुनाव एक साथ नहीं करा सकती, वह पूरे देश में एक साथ चुनाव की बात कर रही है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने की सिफारिश की है। विपक्ष ने भी विधेयक को जेपीसी को भेजने की मांग की। विपक्षी दलों का मानना है कि यह विधेयक केंद्र सरकार के बढ़ते केंद्रीकरण और संघीय ढांचे को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने इसे संविधान विरोधी बताते हुए संसद में गहन चर्चा की मांग की।




