सरायकेला :आज के बदलते जमाने में जहाँ भौतिक प्रगति ने मानव जीवन को सुविधाओं से भर दिया है, वहीं मानसिक और आध्यात्मिक शांति की तलाश और भी प्रासंगिक हो गई है। ऐसे समय में पीठाधीश्वर धर्मपुरा मठ देवकुली बक्सर एवं घरवासडीह पीठ बिहार के युवराज श्री केशवा आचार्य जी महाराज ने जीवन के सारगर्भित विषयों पर प्रकाश डालते हुए समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को जीवन के मूलभूत सिद्धांतों की ओर लौटने की आवश्यकता है। भौतिक सुख-सुविधाएँ जितनी आवश्यक हैं, उससे कहीं अधिक ज़रूरी है आत्मिक विकास और नैतिक मूल्यों का पालन। उन्होंने बताया कि जीवन केवल कर्म करने का नाम ही नहीं, बल्कि एक साधना है — जहाँ संयम, सेवा, और सत्कर्म प्रमुख आधार होते हैं।

आचार्य जी ने यह भी कहा कि आज का युवा वर्ग यदि आत्मबोध, योग और वेदांत के मार्ग पर चले, तो न केवल स्वयं का उद्धार कर सकता है, बल्कि समाज को भी एक आदर्श दिशा में अग्रसर कर सकता है। उन्होंने गीता, उपनिषद, और रामचरितमानस जैसे ग्रंथों के सन्दर्भ में बताया कि सच्चा सुख आत्मा की शांति में है, न कि बाह्य आकर्षणों में।उनका यह संदेश आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है, जब जीवन की भागदौड़ में व्यक्ति अपने अस्तित्व और उद्देश्य को ही भूल गया है। ऐसे संतों की वाणी समाज को जागरूक करने, जीवन को सार्थक बनाने और भारत की आध्यात्मिक विरासत को पुनर्जीवित करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
उक्त बातें the राष्ट्रीय न्यूज़ के चीफ एडिटर और एकता विकास मंच के केंद्रीय अध्यक्ष ए के मिश्रा के आवास बलरामपुर आदर्श नगर गम्हरिया पर अपने शिष्यों को आशीर्वाद देने आए देवकुली धर्मपुरा पीठ बक्सर के पीठाधीश्वर एवं घरवासडीह पीठ के युवराज श्री कमल नारायण केशवा आचार्य जी महाराज ने कहा। उपस्थित शिष्यों में गीता देवी मीना देवी रजनी देवी लक्ष्मी देवी सुनीता देवी अंजली कुमारी खुशी कुमारी अर्जुन तिवारी राजेश सिंह सुनील कुमार रमेश सिंह अंकित कुमार मिश्रा आशुतोष कुमार रुद्र प्रताप आदि अन्य शिष्य उपस्थित रहे।




