Saraikela (संजीव मेहता) : सरायकेला खरसावां जिले के ईचागढ़ में अवैध बालू ढुलाई को लेकर मंगलवार की देर रात डुमटांड़ मोड़ पर बड़ा विवाद हुआ है. बालू उठाव और परिवहन के मामले में अवैध वसूली के विरोध में मौके पर पहुंचे जेएलकेएम नेता तरुण महतो और उनके समर्थकों ने न सिर्फ बालू माफिया पर कार्रवाई की मांग की, जिसको लेकर दोनों तरफ से कहा सुनी हुई जिसमें मामला बढ़ गया और पुलिस टीम पर हमला कर दिया. घटना में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि पुलिस ने मौके से दो गाड़ियाँ जब्त कर तरुण महतो को भी गिरफ्तार कर लिया है.
इस घटना के बाद से क्षेत्र में अवैध बालू ढुलाई और वसूली को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया है.ग्रामीणों का आरोप है कि बालू माफिया खुलेआम बालू के अवैध है खनन करते हैं।इसी मुद्दे को लेकर जेएलकेएम नेता तरुण महतो को बीती रात मौके पर बुलाया गया था. लेकिन स्थिति तब बेकाबू हो गई जब डुमटांड़ मोड़ पर बालू लदे वाहनों से वसूली को लेकर विवाद शुरू हो गया. ग्रामीणों और चालक दल के बीच कहासुनी बढ़ी,और तरुण महतो समर्थकों की भीड़ से अचानक मारपीट शुरू कर दी. सूचना मिलते ही ईचागढ़ थाना प्रभारी विक्रमादित्य पांडे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस जब अवैध वसूली रोकने और भीड़ को तितर-बितर करने लगी, तभी तरुण महतो के समर्थकों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया. इस हिंसक झड़प में आरक्षी नरेश यादव और एक चौकीदार गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.

दोनों को तुरंत अस्पताल भेजा गया और भीड़ की बेकाबू हरकत को देखते हुए पुलिस द्वारा हवाई फायरिंग करने की बातें कही जा रही है। परंतु इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस ने मौके से दो गाड़ियाँ जब्त की हैं, जिनसे जेएलकेएम पार्टी के झंडे और बैनर बरामद किए गए हैं.इसके साथ ही पुलिस ने तरुण महतो को गिरफ्तार कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है. घटना के बाद ईचागढ़ थाना की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और थाना परिसर में अनधिकृत प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया है. दूसरी ओर, तरुण महतो के समर्थक थाने के बाहर भारी संख्या में जुटकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पुलिस और बालू माफिया की मिलीभगत के कारण रात में खुलेआम अवैध ढुलाई होती है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर ढुलाई “लीगल” है तो दिन में कराई जाए, लेकिन रात के अंधेरे में अवैध कारोबार को प्रशासन का संरक्षण मिलता है. सूत्रों का दावा है कि हाईवा प्रति ट्रिप पर महीने के हिसाब से करीब 8,000 रुपये “लिए जाते हैं। अवैध बालू कारोबार पर रोक के नाम पर शुरू हुआ विवाद अब कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती बनते जा रहा है. वहीं पूरे मामले की गंभीरता को लेते हुए राज्य स्तरीय वरीय पदाधिकारी द्वारा कहा गया कि हम इसे देखते हैं।






