जमशेदपुर : आधुनिक जीवन की तेज रफ्तार और बदलते सामाजिक परिवेश के बावजूद बंगाली समुदाय अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को आज भी पूरे गौरव के साथ संजोए हुए है। इसका मनोहारी उदाहरण शनिवार को आयोजित जमाई षष्ठी के अवसर पर देखने को मिला, जब जमशेदपुर के अनेक घरों में उल्लास और अपनत्व का वातावरण नजर आया। इस अवसर पर रिश्तों की गर्माहट और पारिवारिक एकता का अनूठा संगम दिखाई दिया।
यह पर्व केवल दामाद के आदर-सत्कार का अवसर नहीं, बल्कि पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने और सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी माध्यम बना। सुबह से ही घरों में विशेष व्यवस्थाएं की गईं। दामाद के आगमन पर सास ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए उनका स्वागत किया। माथे पर शुभ चिह्न लगाया गया, मंगल दीप से अभिनंदन किया गया और कल्याण एवं लंबी आयु की कामना के साथ पवित्र धागा बांधा गया।

इसके बाद परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठे और विविध व्यंजनों का आनंद लिया। भोजन में बंगाल की प्रसिद्ध पाक परंपरा की झलक देखने को मिली। मछली से बने विशेष पकवान, नरम तली हुई रोटियां, दूध से तैयार मिठाई तथा अन्य पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे। इस तरह जमाई षष्ठी ने पारिवारिक स्नेह, सम्मान और सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया।






