रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा अब पूरी तरह से दूसरी पीढ़ी के युवा नेतृत्व, विशेष रूप से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है। पूर्व अध्यक्ष शिबू सोरेन के युग से आगे निकलते हुए, संगठन अब नई सोच और ताजगी के साथ अपने भविष्य की दिशा तय कर रहा है। हेमंत सोरेन पांच प्रमुख आयामों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिससे पार्टी के ढांचे और विस्तार में बड़े बदलाव आने वाले हैं।

अब पार्टी सीमित दायरे से बाहर निकलकर, झारखंड की सीमाओं से परे बिहार, बंगाल और ओडिशा तक विस्तार की योजना बना रही है। युवाओं को जोड़ने और उन्हें संगठनात्मक भूमिका देने की योजना बन रही है। खासकर शहरी क्षेत्रों में पार्टी को सशक्त बनाने की तैयारी जोरों पर है। संगठन में अनुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को प्राथमिकता दी जा रही है। अब केवल पद लेना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कार्यकुशलता भी सिद्ध करनी होगी। समय-समय पर पदाधिकारियों के कार्यों की निगरानी होगी, और निष्क्रियता पर पद से हटाया भी जा सकता है। झामुमो की यह रणनीति इसे सिर्फ एक क्षेत्रीय दल से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की ओर बढ़ती एक ठोस पहल के रूप में देखी जा रही है।




