उदयपुर :गणगौर का रंगारंग आयोजन उदयपुर में बड़े उल्लास के साथ आरंभ हुआ है। यह तीन दिन तक चलने वाला पारंपरिक आयोजन राजस्थान की समृद्ध विरासत और लोक आस्था को दर्शाता है। इस दौरान महिलाएं लाल और केसरिया रंग की पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी, सिर पर ईशर-गणगौर की सजी हुई प्रतिमाएं रखकर लोकगीतों की मधुर धुन पर नृत्य करती हुई भव्य शोभायात्रा निकालती हैं।
संध्या समय यह उत्सव और भी आकर्षक हो उठता है, जब पिछोला झील में सुसज्जित शाही नौकाओं पर ईशर-गणगौर की राजसी सवारी निकाली जाती है। यह दृश्य देश-विदेश से आए पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। ईशर को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है, वहीं गणगौर माता पार्वती का स्वरूप हैं, जो सौभाग्य और दांपत्य सुख की प्रतीक मानी जाती हैं।

विवाहित महिलाएं इस अवसर पर अपने पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। यह पर्व माता पार्वती के मायके आगमन और फिर शिवलोक वापसी की परंपरा को भी दर्शाता है। ऐतिहासिक गणगौर घाट पर मेहंदी रचे हाथों के साथ एकत्रित महिलाएं इस आयोजन को और भी भव्य बना देती हैं, जो लोक संस्कृति और शाही परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।




