जमशेदपुर : हिंदुओं का महापर्व दुर्गा पूजा काफी करीब है जिसे लेकर जमशेदपुर शहर में विभिन्न पूजा कमेटी के द्वारा भव्य और आकर्षक पंडाल बनाए जा रहे हैं। इसी कड़ी मे जमशेदपुर के न्यू सिद्दगोड़ा दुर्गा एवं काली पूजा पंडाल के बारे में आपको जानकारी दे रहे हैं यह पूजा 1953 में आरंभ हुई थी शुरुआत में काफी छोटे और सिंगाड़ा पंडाल के माध्यम से मां देवी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती थी धीरे-धीरे समय बदलता गया और इसका विस्तार भी होता गया 2002 में कमेटी का फेर बदल करते हुए मुख्य संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह के नेतृत्व में इसे भव्य पूजा के रूप में तब्दील कर दिया गया तब से यह लगातार प्रत्येक वर्ष देश के किसी न किसी प्रतिष्ठित मंदिर , भवन या फिर पर्यटन स्थल के प्रतिरूप में यहां पंडाल बनने लगी और वर्तमान में यह पंडाल कोल्हान में अपना एक स्थान बना लिया है। इसी कड़ी में इस वर्ष गुजरात के अहमदाबाद के पोंचा क्षेत्र में स्थित स्वामी नारायण मंदिर के प्रतिरूप में पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है जिसके लिए पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के अरुण कुमार की 50 से ज्यादा कारीगरों के टीम पंडाल और मूर्ति का निर्माण कर रहे हैं यह पंडाल 140 फीट लंबा 107 फीट चौड़ा और ऊंचाई 90 फिट है जिसे युद्ध गति से निर्माण किया जा रहा है। नारायण मंदिर को 100% पंडाल के माध्यम से श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के लिए मुख्य गेट के समीप एक बड़ा सा तालाब का भी निर्माण किया गया है साथ ही द्वार के दाएं बाएं में विभिन्न देवी देवताओं की मंदिर बनाई गई है जो काफी आकर्षण का केंद्र होगा उसके बाद ही एक अन्य द्वारा में प्रवेश करते ही मां देवी दुर्गा की प्रतिमा का श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे । पंडाल की भव्यता को देख लोग यह भी कह रहे हैं कि इस वर्ष यह दुर्गा पूजा पंडाल पूरे कोल्हान में चर्चा के साथ प्रथम स्थान प्राप्त करेगा ।

वही इस पूजा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए कमेटी में अध्यक्ष पद के रूप में प्रकाश भाई पटेल, महामंत्री के लिए प्रदीप कुमार सिंह, संरक्षक के पद पर विक्रम शर्मा और मुख्य संरक्षक के पद पर चंद्रगुप्त सिंह मौजूद है इसके अलावा चंद्रगुप्त सिंह ने बताया कि पंडाल देखने एवं पूजा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो और उनकी सुरक्षा के लिए 140 वॉलिंटियर पूरे क्षेत्र में तैनात रहेंगे जिसमें 45 महिलाएं भी शामिल है उन्होंने यह भी कहा कि पूजा मैदान इतने बड़े क्षेत्र में फैले हुए हैं कि यहां छोटा सा मेला भी लगता है जिससे परिवार वाले इसका आनंद उठाते हुए कुछ देर आराम भी कर लेते हैं जिस वजह से शहर के अन्य पंडालो के मुकाबले यहां बे तहाशा भीड़ होती है इसी वजह से उनके सुरक्षा के लिए कमिटी के वॉलियंटर हर चप्पे चप्पे पर तैनात रहते हैं ताकि किसी को भी किसी प्रकार से परेशानी ना उठाना पड़े।




