रांची : झारखंड के बोकारो जिले से सामने आए एक बेहद गंभीर मामले ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। पिंड्राजोरा थाना से जुड़ी इस घटना ने पुलिस तंत्र की विश्वसनीयता को झकझोर दिया है। एक 18 वर्षीय युवती, जो पिछले वर्ष जुलाई से लापता थी, उसका कंकाल मधुटांड़ क्षेत्र के जंगल से बरामद किया गया।
यह खुलासा आरोपी दिनेश महतो की निशानदेही पर हुआ, जिसने स्वीकार किया कि उसने युवती को चास कॉलेज के पास बुलाकर सुनसान स्थान पर ले जाकर उसकी हत्या कर दी और शव को छिपा दिया। पीड़ित परिवार महीनों तक न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाद में जांच में सामने आया कि संबंधित थाना के कई कर्मियों ने लापरवाही बरती और जानबूझकर मामले को कमजोर किया। इतना ही नहीं, आरोपी के साथ कथित रूप से सांठगांठ और आर्थिक लेन-देन जैसी बातें भी सामने आईं, जिससे मामला और गंभीर हो गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बोकारो पुलिस अधीक्षक ने सख्त कदम उठाते हुए पिंड्राजोरा थाना के कुल 28 कर्मचारियों को एक साथ निलंबित कर दिया। इसमें अवर निरीक्षक, सहायक अवर निरीक्षक, हवलदार और सिपाही शामिल हैं। यह कार्रवाई राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व मानी जा रही है। बाद में गठित विशेष जांच दल ने तेजी से कार्रवाई करते हुए एक दिन के भीतर पूरे मामले का खुलासा कर दिया। इससे स्पष्ट हुआ कि पहले की जांच में जानबूझकर ढिलाई बरती गई थी। इस घटना ने आम जनता के बीच पुलिस की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है।




