सरायकेला : सरायकेला खरसावां जिले के गम्हरिया अंचल क्षेत्र में इन दिनों भू माफिया बेपरवाह बेखौफ, हाई कोर्ट,144 धारा और सरकारी पदाधिकारीयों के आदेश के धजिया उड़ाते हुए धड़ल्ले से सरकारी जमीन के अतिक्रमण कर बना रहे हैं पक्के मकान।आदित्यपुर रेलवे स्टेशन से सटे गांधीनगर के बगल में ढाई एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध रूप से पक्के निर्माण कराए जा रहे हैं. ताजुब्ब है कि जिस सरकारी जमीन पर 3 बार अतिक्रमण हटाने के बाद धारा 144 लगा दी गई है। मामला सूत्रों के अनुसार हाईकोर्ट में चल रहा है। उस जमीन पर अब कच्चे निर्माण की जगह खुलेआम पक्का निर्माण किया जा रहा है. भू माफिया यहां धड़ल्ले से पक्का निर्माण करवा रहे हैं. जमीन की खरीद बिक्री करने वालों ने बताया कि यह जमीन सहारा गार्डन सिटी से सटे रेलवे स्टेशन के बगल में है। जहां कि जमीन करीब 5 करोड़ रुपये एकड की है, अर्थात कब्जे वाली जमीन करीब 12 से 15 करोड़ रुपये की कीमत की है. जिसे भू माफिया प्लाटिंग कर 20 से 25 लोगों को बेच दी है. सीओ के निर्देश पर हल्का कर्मचारी और आरआईटी पुलिस ने आज काम को बंद कराया है। आज किसी ने जब इस सरकारी जमीन पर पुनः पक्की निर्माण की जानकारी गम्हरिया के सीओ कमल किशोर को दी तो उन्होंने हल्का कर्मचारी और अमीन को वहां भेजा और आरआईटी थाना के पुलिसकर्मियों की मदद से निर्माण कार्य को बंद कराया है. हल्का कर्मचारी ने बताया कि यहां 3 बार अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाकर कच्चे निर्माण को ढहाया जा चुका था और कब्जेधारी के विरुद्ध हाई कोर्ट में केस चल रहा है ।साथ ही कोर्ट ने यहां दोबारा निर्माण कार्य नहीं होने को लेकर धारा 144 लगा रखी है. लेकिन भू माफिया बावजूद इसके गुपचुप तरीके से पक्का निर्माण करा रहा है जो कि हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।

पक्के मकान बनाकर बिजली का कनेक्शन ले चुके हैं कब्जा धारी-
घटना स्थल पर देखने से प्रतीत होता है कि यह निर्माण कार्य महीने भर से चल रहा है. करीब आधा दर्जन पक्के मकान का निर्माण पूरा कर उसमें बिजली का कनेक्शन तक लिया जा चुका है. वहीं दर्जन भर घरों के पक्के निर्माण जारी है। जबकि आधा दर्जन घरों की नींव की खुदाई चल रही थी. आशंका जताई जा रही है कि इस करोड़ों की सरकारी जमीन को हड़पने में सरकारी कर्मचारी के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन भी संलिप्त है जिसके शह पर भू माफिया धड़ल्ले से करोड़ों रुपये खर्च कर यहां पक्के मकान बनवा रहे हैं. फिलहाल सीओ ने निर्माण कार्य बंद कराने का दावा किया है। अब देखना यह है कि यह निर्माण रुकता है या यूंही चलता रहेगा।इसके विरुद्ध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है या भू माफिया इसे बेचकर करोड़ों कमाने में कामयाब हो जाते हैं। यह तो आने वाला वक्त ही बताया कि भू माफिया अपने मकसद में कामयाब होते हैं या प्रशासनिक गाज गिरती है।




