Saraikela (संजीव मेहता) : सरायकेला में चैत्र संक्रांति के अवसर पर घट पूजा (या शुभ घट स्थापना) के साथ पारंपरिक छऊ महोत्सव (चैत्र पर्व) की भव्य शुरुआत हो गई है. यह 3-4 दिवसीय महोत्सव (आमतौर पर 10-13 अप्रैल के आसपास) भगवान शिव (भैरव) को समर्पित है, जहाँ ‘भैरव पूजा’ के बाद कलाकार नृत्य करते हैं.
आज सरायकेला में चैत्र पूजा की शुरुआत सरकारी स्तर पर सरायकेला के एसडीओ अभिनव प्रकाश ने यजमान के तौर पर भैरव पूजन कर किया. बता दें कि चैत्र संक्रांति पर कलश स्थापना (घट पूजा) और अखाड़ा में ‘अखाड़ा मारा’ (छऊ का पारंपरिक शंखनाद) के साथ इसकी शुरुआत होती है. यह सरायकेला शैली का मुखौटा नृत्य है, जो चड़क पूजा से जुड़ा है. इस पर्व का उद्देश्य पारंपरिक अनुष्ठान के साथ होता है.

यह महोत्सव ग्रामीण छऊ दलों के बीच प्रतियोगिता और कला के संरक्षण का मंच भी है. जबकि महाबिशुबा संक्रांति के दिन इसका समापन होता है. इस पर्व का सांस्कृतिक महत्व है. यह महोत्सव चैत्र पर्व के हिस्से के रूप में मनाया जाता है, जिसमें सरायकेला, खरसावां और मयूरभंज की समृद्ध छऊ परंपराओं का प्रदर्शन किया जाता है. यह अनुष्ठान और लोक कला का अनूठा संगम है.




