
झारखंड रांची: झारखंड में डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) के पद को लेकर इन दिनों बड़ा विवाद और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विवाद का केंद्र अनुराग गुप्ता हैं, जो राज्य सरकार की नजर में अभी भी सेवा में हैं, लेकिन केंद्र सरकार उन्हें रिटायर्ड मान चुकी है। यह स्थिति विभागीय अधिकारियों के साथ ही आम जनता के लिए भी उलझन पैदा कर रही है। जो इन दिनो राज्य के राजनीतिक प्रशासनिक एवं आम जनता के बीच, चर्चाओं के झरोखों में है ,और सभी जगह चौक चौराहे पर यह चर्चाएं खूब चल रही है कि, क्या अनुराग गुप्ता डीजीपी है या नहीं?
राज्य सरकार ने अनुराग गुप्ता को रिटायरमेंट के बाद भी डीजीपी पद पर बनाए रखा है, जिससे यह संदेश जा रहा है कि वे अभी भी सेवा में हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने उन्हें सेवा से मुक्त मानते हुए संबंधित प्रक्रियाएं पूरी कर दी हैं। इस टकराव की स्थिति तब और गहराई जब झारखंड के महालेखाकार (AG) ने अनुराग गुप्ता की एक मई से वेतन पर रोक लगा दी है । इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि कुछ संस्थाएं उन्हें सेवा में नहीं मान रही हैं।
यह दोहरी स्थिति केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल नहीं उठा रही, बल्कि इससे कानून व्यवस्था के शीर्ष पद की गरिमा पर भी असर पड़ रहा है। राजनीतिक प्रशासनिक एवं आम जनता सहित सभी चौक चौराहों पर इस मुद्दे पर चर्चाएं तेजी चल रही है। लोग तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं कि आखिर अनुराग गुप्ता रिटायर हैं या नहीं, और कब तक यह सस्पेंस बना रहेगा।
यह मामला केवल एक अधिकारी के पद पर बने रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य-केंद्र के संबंधों, प्रशासनिक पारदर्शिता और संवैधानिक प्रक्रिया की मर्यादा से भी जुड़ा हुआ है।
आखिर अनुराग गुप्ता रिटायर हैं या नहीं, यह सस्पेंस कब तक बना रहेगा। यह प्रशासनिक, राजनीतिक गलियारों सहित आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।




