घाटशिला : आदिवासी समाज ने शनिवार को परंपरागत उत्साह के साथ दाकाय माहा का त्योहार मनाया। यह त्योहार फसल कटाई के बाद पहली फसल को घर लाने और उसका पहला निवाला ग्रहण करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस अवसर पर आदिवासी समाज के पुरुष, महिलाएं और बच्चे पारंपरिक परिधान पहनकर शामिल हुए और पूरे उल्लास के साथ सोहराय गीत गाकर खुशियाँ मनाई। पुरुषों ने मादर और नगाड़ा बजाते हुए बांसुरी के साथ सोहराय गीत गाए, और पूरे मुहल्ले में घूम-घूमकर उत्सव की रौनक बढ़ाई। वहीं, महिलाएं कांसे का शुद्ध लोटा पानी और सूप लेकर गाय-बैलों को चुमाकर उनका सम्मान करती नजर आईं। यह अनुष्ठान समाज में बैलों के महत्व और उनके प्रति कृतज्ञता दर्शाने का प्रतीक है। इस पर्व में विशेष रूप से हड़िया (चावल से निर्मित पेय) का सेवन किया गया। सभी लोग एक-दूसरे के घर जाकर हड़िया पिलाते हैं, जो सामूहिकता और भाईचारे का प्रतीक है।

यह एक तरह से समाज के सभी सदस्यों के बीच प्रेम और सहयोग को बढ़ावा देने का माध्यम भी है। रविवार यानी आज गोरू खूंटाव प्रतियोगिता आयोजित होगी, जिसमें बैलों को खूंटे से बांधकर ढोल-नगाड़े बजाकर नचाया जाएगा। प्रतियोगिता में विजेता बैल के मालिक को पुरस्कृत किया जाएगा, जो उनके बैलों की शक्ति और सज्जनता का प्रतीक माना जाता है। समाज के लोगों का कहना है कि यह त्योहार उनके लिए खास होता है क्योंकि यह अच्छी फसल के लिए आभार व्यक्त करने और प्रकृति के प्रति सम्मान जताने का अवसर है। दाकाय माहा न केवल उनकी परंपराओं का हिस्सा है, बल्कि सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है।




