
जमशेदपुर : जमशेदपुर के बर्मामाइंस स्तिथ देवस्थानम परिसर में क्रीड़ा भारती के द्वारा खेल संस्कृति का विकास एवम चुनौतियां विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमे खिलाड़ियों,कोच और संयोजक के साथ होने वाले चुनौतियों पर चर्चा की गई इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर क्रीड़ा भारती के अखिल भारती संगठन मंत्री प्रसाद जी महांकर के आलावे पूर्व पत्रकार विनोद राणा ,ओलंपिक संघ के हरभजन सिंह,क्रीड़ा भारती के झारखंड प्रदेश के उपाध्यक्ष सह जमशेदपुर के अध्यक्ष शिव शंकर सिंह सहित गणमान्य लोग एवम खिलाड़ी और खेल शिक्षक मौजूद थे । इस दौरान अपनी बातो को रखते हुए हरभजन सिंह ने वर्तमान खेल परिस्थिति पर चिंता जताते हुए कहा की जमशेदपुर खेल संघ सिर्फ नाम मात्र की रह गई है स्तिथि ऐसी हो गई है की कभी टाटा स्टील स्पोर्ट्स परिसर में लगभग 400 खिलाड़ियों को रखने की व्यवस्था थी आज ग्राउंड के लिए भी पैसे देने पड़ते है। विगत 10 वर्षो में एक भी खिलाड़ी जमशेदपुर का नाम रौशन नही किया है कारण खिलाड़ियों को गुणवत्ता युक्त ट्रेनिंग नही मिल पा रही है। जिला और राज्य स्तरीय खेल का आयोजन नही हो रहा है। पहले खिलाड़ी तैयार किए जाते थे आज बच्चो को खुद पैसे देकर ट्रेनिंग लेना पड़ रहा है। खेल के मैदान ना के बराबर हो गए है, जो है, उसके लिए पैसे देना पड़ता है। खेल के नाम पर व्यवसायकरण हो गया है। सालाना खेल का खर्च करोड़ों में हो गया है। यही कारण है कि खेल महंगा हो गया है। टाटा स्टील आई पी एल में पैसे लगा रही है लेकिन खिलाड़ी के लिए नही,हम खिलाड़ी के मामले में काफी पिछड़ गए है जो काफी गंभीर विषय है। उन्होंने कहा की ऐसे संगोष्ठी के माध्यम से ही इस तरह की खामियों को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है।
इधर विनोद राणा ने कहा की खेल बहुत सारे है जो महंगा है लेकिन कुछ खेल ऐसा भी है जिसमे खर्च काफी कम है जैसे फुटबाल, कब्बड्डी। इसके लिए संस्था या संघ को छोटे छोटे बस्तियों के बच्चो युवाओं को जोड़ना होगा एक प्लेटफार्म तैयार कर खिलाड़ियों के हुजूम को बढ़ाया जा सकता इससे युवाओं को नशे से दूर भी किया जा सकता है। जिससे खेल के प्रति युवाओं का रुझान भी बढ़ेगा। वही शिवशंकर सिंह ने कहा की संस्था को सिर्फ खिलाड़ियों से जीत या ट्राफी की ही उम्मीद नही करनी चाहिए बल्कि उसे और कैसे बेहतर कर सके उस पर कार्य करने की आवश्यकता है। यही कारण है की वर्तमान में खिलाड़ियों और कोच के बीच समस्या उत्पन्न हो जा रही हैं। यह काफी चिंतनीय विषय है।




