
रांची: झारखंड में विगत कुछ वर्षों से ईडी की कार्रवाई लगातार चल रही है। जिसे राज्य के प्रशासनिक अधिकारी से लेकर राजनीतिक दलों तक मे कोहराम मचा हुआ रह रहा है। मंत्री से लेकर संत्री तक बेचैन रह रहे हैं । ईडी की कार्रवाई में ही , आईएएस और यहां तक की पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी सलाखों के पीछे हैं। एक बार फिर झारखंड में ईडी की कार्रवाई तेज हो गई है, और गिरफ्तार ग्रामीण विकास मंत्री की और मिली 5 दिन के ईडी के रिमांड से कई राज और उजागर हो सकते हैं। आलमगीर आलम की मिले डायरी के पन्नों से कई अधिकारी और मंत्रियो ठेकेदारों के होश उड़े हुए हैं।
जिससे राज्य में राजनीति एवं प्रशासनिक पारा चढ़ा हुआ है । राज्य के राजनीतिक एवं प्रशासनिक अधिकारी डरे सहमे रह रहे हैं कि, कब कहां किसके यहां ईडी की रेड हो जाए कहां नहीं जा सकता। प्रवर्तन निदेशालय के रडार पर ग्रामीण विकास विभाग के पूर्व सचिव मनीष रंजन भी आ गए हैं।जहां उन्हें समन कर उपस्थित होने के लिए 24 मई को बुलाया गया है। झारखंड में आईएएस अधिकारियों को लेकर एक बार फिर चर्चा का बाजार गर्म हो गया है, कि जिस तरह ईडी ने मनरेगा घोटाला में आईएएस पूजा सिंघल, जमीन घोटाला में आईएएस छविरंजन को गिरफ्तार किया है। कहीं टेंडर कमीशन घोटाला में अब आईएएस मनीष रंजन की बारी तो नहीं है! क्यों कि इसी माह ईडी ने ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव लाल और संजीव लाल के नौकर जहांगीर आलम को गिरफ्तार कर कई राज खोला है और बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने करीब लगभग 38 करोड़ रुपए कैश के अलावा भारी मात्रा में लेनदेन से संबंधित दस्तावेज भी बरामद की है। जिसकी जांच की दायरा बढ़ाते हुए कई आईएएस और एक आईपीएस सहित मंत्रियों और कई ठेकेदार, बिल्डरों पर भी गाज गिर सकती है। जिससे मंत्री से लेकर संत्री और अधिकारियों तक बेचैनी बढ़ी हुई है।
ईडी की कार्रवाई से झारखंड की सियासत में आए दिन तूफान आते रह रहे हैं। देखना अब यह है कि ईडी की कार्रवाई से एक बार फिर झारखंड की राजनीति और अधिकारियों पर क्या असर डालता है।




