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जमशेदपुर : जो टूटकर भी न बिखरे वो दिल बनाए बैठे हैं
हम अपनी हार को भी हौसला बनाए बैठे हैं
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उम्र भर तेरी मोहब्बत का भरम रखने के लिए
हम तेरी याद का दिल में मकाँ बनाए बैठे हैं

मुझको समंदरों ने डराया बहुत मगर फिर भी
हम अपनी निगाहों में कई साहिल बनाए बैठे हैं
क़दम थके हैं मगर हौसला अभी बाक़ी है
हम अपनी राह में कुछ मरहले बनाए बैठे हैं
वो ज़माने की निगाहों में बड़े होंगे मगर
हम भी ख़ुद्दारी का इक आसमाँ बनाए बैठे हैं।






