रांची : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को झारखंड उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह एक महिला न्यायिक अधिकारी की याचिका पर फिर से विचार करे। यह याचिका उस निर्णय के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें उनके बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी देने से मना कर दिया गया था। पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे, ने कहा कि उच्च न्यायालय पूर्व में याचिका खारिज होने की बात को नजरअंदाज कर स्वतंत्र रूप से मामले का मूल्यांकन करे।

इस पर झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता को तीन दिनों के भीतर आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त करने को कहा गया। साथ ही, अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि यह विषय एक महत्वपूर्ण दृष्टांत बन सकता है, इसलिए उच्च न्यायालय को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। यह याचिका एक अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाली अतिरिक्त जिला न्यायाधीश द्वारा दाखिल की गई थी। उन्होंने जून से दिसंबर तक का अवकाश अपने बच्चे की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए मांगा था, जिसे नकार दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार और न्यायालय रजिस्ट्री से भी इस पर जवाब मांगा है।




