नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि अवैध भवन निर्माण को नियमित नहीं किया जा सकता, चाहे वह निर्माण कितना भी पुराना हो। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई निर्माण स्थानीय निकाय द्वारा स्वीकृत नक्शे से हटकर या बिना स्वीकृति के किया गया है, तो इसे नियमित करना नियमों का उल्लंघन होगा और ऐसा करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा। यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने के मामले में दिया गया, जिसमें अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि नियमों के अनुपालन के बिना निर्माण स्वीकार्य नहीं है और ऐसे मामलों में नरमी दिखाना गलत होगा। रांची में इस आदेश का गहरा प्रभाव हो सकता है, क्योंकि शहर में लाखों घर बिना स्वीकृत नक्शे के बने हैं।

करीब आठ साल पहले रघुवर दास सरकार ने ऐसे निर्माणों को नियमित करने की योजना बनाई थी। हेमंत सोरेन सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाए थे और नगर विकास विभाग ने इस मुद्दे पर कई बैठकें की थीं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश ने इन योजनाओं पर सवाल खड़ा कर दिया है। रांची जैसे शहरों में, जहां बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुआ है, यह आदेश आम नागरिकों और सरकार दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस आदेश के आलोक में इन मुद्दों का समाधान कैसे करती है।




